
यूपी डेस्क: 68,500 शिक्षक भर्ती में कथित आरक्षण विसंगतियों और संशोधित परिणाम की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन सोमवार को एक बार फिर तेज हो गया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लखनऊ पहुंचे अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान अभ्यर्थियों ने जमकर नारेबाजी की और पात्र अभ्यर्थियों को न्याय देने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने सीटी बजाकर और नारे लगाकर सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचा। मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उन्हें ईको गार्डन भेज दिया।
150 में 60 अंक वालों के संशोधित परिणाम की मांग
अभ्यर्थियों का मुख्य मुद्दा ओबीसी और अन्य आरक्षित वर्गों से जुड़ी कथित आरक्षण विसंगतियां हैं। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति के मुताबिक ओबीसी अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत अर्हता छूट का लाभ मिलना चाहिए।
अभ्यर्थियों की मांग है कि 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले पात्र अभ्यर्थियों का संशोधित परिणाम जारी किया जाए। इसके बाद पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
अभ्यर्थी आरक्षण से जुड़ी कथित विसंगतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से लंबित इस मामले पर अब स्पष्ट फैसला होना चाहिए।
सितंबर में भी मंत्री के आवास पर हुआ था प्रदर्शन
68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का यह पहला प्रदर्शन नहीं है। 19 सितंबर को अलीगढ़ में भी बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पर अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया था। उस दौरान भी संशोधित परिणाम जारी करने और आरक्षित वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग उठाई गई थी।
इसके बाद लखनऊ में भी अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी रहा। अभ्यर्थियों की ओर से कहा गया है कि 1 सितंबर से ईको गार्डन में लगातार धरना चल रहा है।
बीजेपी प्रदेश कार्यालय के बाहर भी प्रदर्शन
24 सितंबर को 68,500 शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने लखनऊ स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय के सामने भी प्रदर्शन किया था। उस प्रदर्शन में भी ओबीसी और दिव्यांग आरक्षण, पांच प्रतिशत अर्हता छूट, संशोधित परिणाम और नियुक्ति की मांग प्रमुख थी।
ब्रजेश पाठक और केशव मौर्य के आवास तक पहुंचे अभ्यर्थी
अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए अभ्यर्थियों ने दूसरे वरिष्ठ नेताओं के आवासों पर भी प्रदर्शन किया है। हाल के आंदोलनों के दौरान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास पर भी प्रदर्शन किया गया था।
इसके अलावा अभ्यर्थी उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास तक भी पहुंचे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप कर मामले का समाधान कराने की मांग की है।
इस तरह 68,500 शिक्षक भर्ती का मुद्दा अब केवल बेसिक शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं रह गया है। अभ्यर्थी लगातार सरकार के अलग-अलग जिम्मेदार पदाधिकारियों और राजनीतिक नेतृत्व के सामने अपनी मांगें रख रहे हैं।
मंत्री के साथ हो चुकी है उच्चस्तरीय बैठक
मामले को लेकर 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक भी हुई थी। इसमें विभागीय अधिकारियों और अभ्यर्थियों के प्रतिनिधियों ने संशोधित परिणाम, आरक्षण और नियुक्ति से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
बैठक के बाद मंत्री की ओर से मामले को मुख्यमंत्री के सामने रखने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद अभ्यर्थियों का आंदोलन थमा नहीं है।
2 अक्टूबर को अभ्यर्थियों ने केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल से भी मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था। अभ्यर्थियों के मुताबिक, उन्हें भी मामले को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के सामने रखने का भरोसा दिया गया है।
सात साल पुरानी भर्ती, अब भी नियुक्ति का इंतजार
68,500 सहायक शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया 2018 में शुरू हुई थी। आरक्षण और अर्हता से जुड़े विवादों के कारण यह मामला वर्षों से आंदोलन के साथ-साथ कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच बना हुआ है।
अब अभ्यर्थियों की मांग है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति के आधार पर सरकार संशोधित परिणाम जारी करे और पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ करे।
सोमवार के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया। अब आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई और मंत्री स्तर पर प्रस्तावित वार्ता पर है।
मुख्य मांगें
- आरक्षण संबंधी विसंगतियों का समाधान
- ओबीसी अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत अर्हता छूट
- 150 में 60 अंक वाले पात्र अभ्यर्थियों का संशोधित परिणाम
- पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति
- आरक्षण विसंगतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
- राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुतियों पर कार्रवाई
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