
बिजनेस डेस्क: उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) की अहम भूमिका है। राज्य में करीब 90 लाख MSME इकाइयां संचालित हो रही हैं, जो देश के कुल 6.33 करोड़ MSME आधार का लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा हैं। इन्हीं इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश MSME प्रमोशन नीति लागू की थी। यह नीति पहली बार वर्ष 2017 में लागू हुई और वर्ष 2022 में इसे और प्रभावी बनाया गया।
इस नीति का उद्देश्य नए उद्योगों को बढ़ावा देना, मौजूदा इकाइयों को मजबूती देना, विनिर्माण क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बनाना और बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करना है। साथ ही बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को गति देना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।
क्या है MSME प्रमोशन नीति का उद्देश्य?
उत्तर प्रदेश MSME प्रमोशन नीति के तहत सरकार निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने पर भी जोर देती है। इसी वजह से बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने वाले उद्यमियों को अतिरिक्त रियायतें और प्रोत्साहन दिए जाते हैं, ताकि इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ सकें।
किन-किन सुविधाओं का मिलता है लाभ?
इस नीति के तहत MSME इकाइयों को कई प्रकार की वित्तीय और प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
पूंजी सब्सिडी के तहत बुंदेलखंड और पूर्वांचल में 25 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 15 प्रतिशत तक की सहायता दी जाती है। वहीं मध्यांचल और पश्चिमांचल में 20 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 10 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान है। महिला उद्यमियों और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों को इसमें 2 प्रतिशत अतिरिक्त लाभ मिलता है।
सूक्ष्म इकाइयों को पात्र टर्म लोन पर पांच वर्षों तक 50 प्रतिशत ब्याज प्रतिपूर्ति दी जा सकती है। इसकी अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये प्रति इकाई निर्धारित की गई है।
स्टाम्प ड्यूटी में भी बड़ी राहत दी गई है। पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्रों में 100 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान है, जबकि मध्यांचल और पश्चिमांचल में, गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद को छोड़कर, 75 प्रतिशत तक छूट मिलती है।
कृषि भूमि को औद्योगिक उपयोग में बदलने पर भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क में 100 प्रतिशत तक की छूट दी जाती है। इसके अलावा इकाई शुरू होने की तारीख से पांच वर्षों तक 100 प्रतिशत तक EPF प्रतिपूर्ति की सुविधा भी उपलब्ध है।
नीति के तहत घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट फाइलिंग, GI पंजीकरण तथा ISO जैसे गुणवत्ता प्रमाणन पर भी वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। वहीं स्वीकृत MSME औद्योगिक पार्क या फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स में स्थापित परियोजनाओं को प्रति वर्ष अधिकतम 2 करोड़ रुपये की सीमा तक 50 प्रतिशत इंफ्रास्ट्रक्चर ब्याज सब्सिडी का लाभ मिलता है।
सिंगल विंडो सिस्टम से आसान हुई प्रक्रिया
सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल बनाया है। सभी सब्सिडी और रियायतों के लिए MSME1Connect पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। इसी पोर्टल पर आवेदन जमा करने, उसकी स्थिति जानने और सत्यापन जैसी सभी प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। इससे उद्यमियों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।
महिला उद्यमियों और वंचित वर्गों को विशेष प्रोत्साहन
पंजीकृत MSME इकाइयों में महिला उद्यमियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए नीति में महिला उद्यमियों तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए पूंजी सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी छूट और अन्य सुविधाओं में अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
पारंपरिक उद्योगों को भी मिल रहा बढ़ावा
उत्तर प्रदेश हस्तशिल्प, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, कालीन और रेडीमेड परिधान जैसे क्षेत्रों में लंबे समय से अग्रणी रहा है। इन क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा MSME इकाइयों के माध्यम से संचालित होता है। सरकार का कहना है कि नीति के तहत मिलने वाली सुविधाएं इन पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक बनाने और वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाने में भी मदद कर रही हैं।
Navyug Samachar