हेल्थ डेस्क : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना और गलत बॉडी पोस्चर लोगों की रीढ़ की हड्डी पर सबसे ज्यादा असर डाल रहे हैं। यही वजह है कि कम उम्र में ही पीठ दर्द, शरीर में अकड़न और झुककर चलने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रीढ़ की हड्डी शरीर का मुख्य आधार होती है और इसकी सेहत बेहतर रहने पर शरीर लंबे समय तक चुस्त, संतुलित और जवान नजर आता है।
योग को रीढ़ की मजबूती और लचीलेपन के लिए बेहद प्रभावी माना जाता है। नियमित रूप से कुछ खास योगासनों का अभ्यास करने से पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, शरीर का संतुलन बेहतर होता है और उम्र बढ़ने के असर को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मारीच्यासन से बढ़ेगा रीढ़ का लचीलापन
रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाने के लिए मारीच्यासन बेहद लाभकारी माना जाता है। इस आसन के अभ्यास के लिए सबसे पहले दंडासन की मुद्रा में बैठें। इसके बाद दाहिने घुटने को मोड़कर बाएं हाथ को दाहिनी जांघ के बाहर रखें और धीरे-धीरे शरीर को दाईं ओर मोड़ें।
कुछ सेकंड तक सामान्य गति से गहरी सांस लेते रहें और फिर दूसरी दिशा में यही प्रक्रिया दोहराएं। यह आसन रीढ़ की गतिशीलता बढ़ाने के साथ शरीर के संतुलन को भी बेहतर बनाता है।
बालासन से मिलेगी रीढ़ को राहत
बालासन को सबसे आरामदायक योगासनों में गिना जाता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को आराम देने के साथ मानसिक तनाव भी कम करता है।
इसका अभ्यास करने के लिए वज्रासन में बैठकर शरीर को आगे की ओर झुकाएं और माथे को जमीन से स्पर्श कराएं। दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाकर कुछ देर इसी स्थिति में रहें। यह आसन पीठ के निचले हिस्से में जमा तनाव को कम करने और शरीर को रिलैक्स करने में मदद करता है।
भुजंगासन से मजबूत होगी पीठ
भुजंगासन रीढ़ की हड्डी और पीठ के ऊपरी हिस्से को मजबूत बनाने वाला महत्वपूर्ण योगासन है। इसके लिए पेट के बल लेटकर दोनों हथेलियों को कंधों के नीचे रखें और धीरे-धीरे सिर तथा छाती को ऊपर उठाएं।
इस आसन के नियमित अभ्यास से रीढ़ में लचीलापन बढ़ता है, पीठ की जकड़न कम होती है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए यह आसन विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है।
नौकासन से मिलेगा डबल फायदा
नौकासन केवल रीढ़ की हड्डी ही नहीं, बल्कि पूरे कोर हिस्से को मजबूत बनाने में मदद करता है। इस आसन को करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं और धीरे-धीरे सिर, हाथों और पैरों को एक साथ ऊपर उठाएं।
शरीर को नाव के आकार में संतुलित रखने की कोशिश करें। यह आसन पेट, पीठ और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है तथा शरीर की सहनशक्ति बढ़ाने में भी मददगार साबित होता है।
रीढ़ की सेहत के लिए क्यों जरूरी है योग?
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ रीढ़ न केवल शरीर को सही आकार देती है, बल्कि चलने, बैठने, झुकने और दैनिक गतिविधियों को भी आसान बनाती है। नियमित योगाभ्यास से पीठ दर्द की समस्या कम हो सकती है, शरीर में लचीलापन बना रहता है और बढ़ती उम्र के प्रभाव को भी धीमा किया जा सकता है।
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