लखनऊ डेस्क : हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और इन्हीं में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली निर्जला एकादशी इस वर्ष 25 जून को मनाई जाएगी। यह व्रत सभी एकादशियों के समान पुण्य फल देने वाला माना जाता है और इसे सबसे कठिन व्रतों में भी शामिल किया जाता है, क्योंकि इस दिन बिना जल ग्रहण किए उपवास रखा जाता है।
भद्रा का रहेगा प्रभाव, लेकिन पाताल लोक में होगा वास
पंचांग के अनुसार इस बार निर्जला एकादशी के दिन भद्रा का प्रभाव भी रहेगा, जो सुबह 07 बजकर 08 मिनट से रात 08 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। हालांकि ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस अवधि में भद्रा का वास पाताल लोक में रहेगा, इसलिए इसका प्रभाव धरती पर होने वाले पूजा-पाठ या व्रत पर नहीं पड़ेगा।
पूजा-पाठ और व्रत पर नहीं होगा कोई असर
ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि भद्रा का यह स्वरूप पूजा-अनुष्ठानों में किसी प्रकार की बाधा नहीं डालता। ऐसे में निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना, व्रत और अन्य धार्मिक कार्य निर्धारित शुभ मुहूर्तों में पूरी तरह से किए जा सकेंगे।
निर्जला एकादशी के शुभ मुहूर्त
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 05 मिनट से 04 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना गया है।
चार शुभ योगों का बन रहा विशेष संयोग
इस वर्ष निर्जला एकादशी पर कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है। सुबह 05 बजकर 25 मिनट से शाम 04 बजकर 29 मिनट तक रवि योग रहेगा। इसके अलावा शिव योग और सिद्ध योग भी पूरे दिन प्रभावी रहेंगे। साथ ही इस बार यह पावन व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है, जो भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। ऐसे में इस एकादशी का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
आस्था और पुण्य का विशेष पर्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत रखने से सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार पांडु पुत्र भीम ने भी यह व्रत किया था, इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।
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