
नेशनल डेस्क: भारत विदेशी कंपनियों के लिए तेजी से एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में उभर रहा है। लगभग डेढ़ अरब की आबादी वाले इस बड़े बाजार में वैश्विक कंपनियां और संस्थागत निवेशक लगातार दांव लगा रहे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, हाल के महीनों में विदेशी कंपनियों ने भारत में 90 अरब डॉलर (करीब 8.60 लाख करोड़ रुपये) से अधिक के नए निवेश की घोषणाएं की हैं। यह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
एआई और डिजिटल सेक्टर में बड़े निवेश पर फोकस
सूत्रों के मुताबिक, ये निवेश प्रतिबद्धताएं मुख्य रूप से कृत्रिम मेधा (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण और औद्योगिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में की गई हैं। वैश्विक स्तर पर व्यापारिक बाधाओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच कंपनियां भारत को तेजी से विस्तार के लिए सुरक्षित और संभावनाओं से भरा बाजार मान रही हैं।
गूगल से लेकर अमेजन तक का बड़ा दांव
सबसे बड़ी निवेश प्रतिबद्धताओं में से एक गूगल की है, जिसने फरवरी में अगले पांच वर्षों में भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 15 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की थी। इसमें डेटा सेंटर, समुद्र के भीतर कनेक्टिविटी, क्लाउड क्षमता और स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम शामिल हैं।
वहीं ऑस्ट्रेलिया की एयरट्रंक ने 2030 तक भारत में 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने के लिए 30 अरब डॉलर निवेश का ऐलान किया है। इसे भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अब तक के सबसे बड़े निवेशों में से एक माना जा रहा है।
इसके अलावा कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड ने सीटीआरएलएस डेटासेंटर्स के साथ मिलकर हाइपरस्केल डेटा सेंटर क्षमता विस्तार के लिए 7,000 करोड़ रुपये तक निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
फ्रांस की सेंट-गोबेन ने भी भारत में अगले पांच वर्षों में एक अरब यूरो के अतिरिक्त निवेश की घोषणा की है और भारत को अपने सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल बताया है।
सबसे हालिया और बड़े निवेशों में अमेजन की घोषणा शामिल है, जिसके सीईओ एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद बताया कि कंपनी 2030 तक भारत में अपने निवेश को बढ़ाकर 48 अरब डॉलर तक करेगी।
क्यों भारत पर बढ़ा विदेशी कंपनियों का भरोसा
जानकारों के मुताबिक, भारत वैश्विक कंपनियों के लिए सिर्फ एक बड़ा बाजार ही नहीं, बल्कि भविष्य के विकास, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और मैन्युफैक्चरिंग विस्तार का अहम केंद्र बनता जा रहा है। मौजूदा वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत को अपेक्षाकृत स्थिर और अवसरों से भरा बाजार माना जा रहा है।
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