Monday , 5 October 2026

‘संसद लोकतंत्र की आत्मा है’… अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का बड़ा संदेश

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस के अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देशवासियों, जनप्रतिनिधियों और दुनिया भर की लोकतांत्रिक संस्थाओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह दिवस विश्वभर की संसदों की भूमिका, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनप्रतिनिधित्व के महत्व को रेखांकित करता है तथा लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करता है।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में ओम बिरला ने संसद को लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए कहा कि यह जनता की आकांक्षाओं, अधिकारों और विश्वास की सर्वोच्च अभिव्यक्ति का मंच है। उन्होंने कहा कि संसद वह स्थान है जहां विचारों का मंथन होता है, नीतियां बनाई जाती हैं और राष्ट्र के भविष्य की दिशा तय की जाती है।

‘सशक्त संसद ही लोकतंत्र की असली ताकत’

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि एक मजबूत, स्वतंत्र और जवाबदेह संसद ही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति होती है। उन्होंने कहा कि संसद नागरिकों के अधिकारों की सबसे बड़ी संरक्षक है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में इसकी केंद्रीय भूमिका होती है।

ओम बिरला ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की संसद ने हमेशा संविधान की भावना, लोकतांत्रिक परंपराओं और जनप्रतिनिधित्व की गौरवशाली विरासत को सशक्त किया है। उन्होंने कहा कि विविधताओं से भरे भारत में संसद राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों का महत्वपूर्ण मंच है, जहां हर क्षेत्र, हर वर्ग और हर नागरिक की आवाज को स्थान मिलता है।

विधायी कार्यों से कहीं अधिक व्यापक है संसद की जिम्मेदारी

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान समय में संसद की भूमिका केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है। संसद सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने, जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा को प्रोत्साहित करने, लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने और नागरिकों के अधिकारों तथा कर्तव्यों के बीच संतुलन स्थापित करने का भी महत्वपूर्ण कार्य करती है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस लोकतंत्र की मूल भावना—संवाद, सहमति, पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक मर्यादाओं—को और मजबूत करने का संकल्प लेने का अवसर है।

हर साल 30 जून को मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस

अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस प्रतिवर्ष 30 जून को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1889 में अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) की स्थापना हुई थी। बाद में वर्ष 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 30 जून को आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस घोषित किया।

इस दिवस का उद्देश्य लोकतंत्र, सुशासन, मानवाधिकारों और जनप्रतिनिधित्व को मजबूत करने में संसदों की भूमिका को वैश्विक स्तर पर रेखांकित करना है।

180 से अधिक संसदों का वैश्विक मंच है आईपीयू

अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) को दुनिया की संसदों का प्रमुख वैश्विक मंच माना जाता है। इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा में स्थित है और इसमें 180 से अधिक राष्ट्रीय संसदें सदस्य हैं। यह संस्था लोकतंत्र को सशक्त बनाने, अंतरराष्ट्रीय संवाद और कूटनीति को बढ़ावा देने, शांति एवं सहयोग को प्रोत्साहित करने तथा विभिन्न संसदों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान का कार्य करती है।

आईपीयू और सीपीए में भारत की सक्रिय भूमिका

भारत विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में आईपीयू और कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन (सीपीए) का सक्रिय सदस्य है। सीपीए इंडिया रीजन के अंतर्गत देश की 32 संसदीय और विधायी शाखाएं शामिल हैं। अफ्रीका क्षेत्र के बाद सीपीए में सबसे अधिक सदस्य शाखाएं भारत की हैं।

सीपीए इंडिया रीजन को नौ प्रशासनिक जोनों में विभाजित किया गया है। इसका उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र, सुशासन, विधायी सहयोग और लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करना है। अंतरराष्ट्रीय संसदीय दिवस लोकतांत्रिक मूल्यों, प्रतिनिधित्व और जवाबदेह शासन व्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 16.7 को भी मजबूती प्रदान करता है, जो सभी स्तरों पर समावेशी, भागीदारीपूर्ण और प्रतिनिधिक निर्णय प्रक्रिया पर बल देता है।

 

Check Also

CEC ज्ञानेश कुमार पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, निलंबन से लेकर SIR और Form 6 तक उठे बड़े सवाल

नेशनल डेस्क: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली को लेकर उठे सवाल अब सुप्रीम …