Monday , 5 October 2026

जज को कथित धमकियों पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का कड़ा रुख, बोला- दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई

नेशनल डेस्क : मध्य प्रदेश की एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश को फैसला सुनाने के बाद कथित धमकियां मिलने और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने सख्त रुख अपनाया है। एसोसिएशन ने कहा है कि न्यायिक अधिकारियों को डराने, धमकाने या उन पर दबाव बनाने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

एसोसिएशन ने मध्य प्रदेश सरकार और उच्च न्यायालय से मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अनिवार्य बताया है।

फैसले के बाद कथित धमकियों का मामला

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से सचिव प्रज्ञा बघेल द्वारा जारी बयान में कहा गया कि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान को एक आपराधिक मामले में फैसला सुनाने के बाद कथित रूप से धमकियां दी गईं। उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियां और कथित तौर पर डर का माहौल बनाने की कोशिश भी की गई।

बयान के अनुसार यह मामला उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें एक लिंचिंग प्रकरण में कथित गौरक्षक समूह के कुछ सदस्यों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई थी। एसोसिएशन ने कहा कि ऐसी घटनाएं न्यायपालिका की निष्पक्षता और स्वतंत्र कार्यप्रणाली के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।

तत्काल और निष्पक्ष जांच की मांग

एसोसिएशन ने कहा कि वह मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय और राज्य सरकार से अपेक्षा करता है कि पूरे मामले की तुरंत, निष्पक्ष और प्रभावी जांच कराई जाए। जो लोग न्यायिक अधिकारी को कथित रूप से धमकाने, उनके खिलाफ नफरत फैलाने या भय का वातावरण बनाने में शामिल हैं, उनकी पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामले में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है और न्यायाधीश की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

‘न्यायिक अधिकारियों को मिलना चाहिए पूरा संरक्षण’

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा कि कानून का पालन कराने वाले न्यायिक अधिकारियों को स्वयं भी कानून का पूरा संरक्षण मिलना चाहिए। न्यायिक पद पर बैठे लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि वे बिना किसी भय या दबाव के अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर सकते हैं।

बयान में कहा गया कि किसी भी न्यायाधीश को अपने फैसले के कारण धमकियों या दबाव का सामना नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

जिला न्यायपालिका को बताया न्याय व्यवस्था की नींव

एसोसिएशन ने कहा कि जिला न्यायपालिका देश की न्यायिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण और मजबूत नींव है। देशभर के जिला न्यायालयों में प्रतिदिन हजारों दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई होती है, जिनमें कई अत्यंत संवेदनशील मामले भी शामिल रहते हैं।

ऐसे में न्यायिक अधिकारियों के लिए भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि वे कानून और संविधान के अनुसार स्वतंत्र रूप से निर्णय दे सकें।

तबस्सुम खान के समर्थन में उतरी एसोसिएशन

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वह न्यायाधीश तबस्सुम खान के साथ मजबूती से खड़ा है। एसोसिएशन ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता, गरिमा और निष्पक्षता की रक्षा के अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि किसी न्यायाधीश को उसके फैसले के कारण निशाना बनाना पूरी न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को चुनौती देने जैसा है।

एसोसिएशन के अनुसार ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई न केवल संबंधित न्यायिक अधिकारी की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।

 

Check Also

CEC ज्ञानेश कुमार पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, निलंबन से लेकर SIR और Form 6 तक उठे बड़े सवाल

नेशनल डेस्क: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली को लेकर उठे सवाल अब सुप्रीम …