Thursday , 10 September 2026

तेल कंपनियों पर बढ़ा घाटे का बोझ! पेट्रोल-डीजल और LPG बिक्री में 2.19 लाख करोड़ की अंडर-रिकवरी, सरकार ने बताई वजह

बिजनेस डेस्क : सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि 30 जून तक पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बिक्री पर सरकारी तेल कंपनियों को कुल 2.19 लाख करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा है। यह स्थिति तब बनी जब वैश्विक बाजार में ऊर्जा कीमतें ऊंची रहीं, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम कीमत पर ईंधन उपलब्ध कराया गया।

मंत्री के अनुसार अंडर-रिकवरी का अर्थ किसी उत्पाद की लागत और उसकी बिक्री कीमत के बीच का अंतर होता है। यानी कंपनियां लागत से कम कीमत पर उत्पाद बेच रही थीं, जिससे उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।

पेट्रोल, डीजल और LPG पर कितना हुआ नुकसान?

सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में पेट्रोल पर 19,905 करोड़ रुपये, डीजल पर 1.44 लाख करोड़ रुपये और एलपीजी पर 24,148 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी दर्ज की गई।

इसके अलावा पिछली तिमाहियों से एलपीजी पर 30,720 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी पहले से लंबित थी। कुल मिलाकर तेल विपणन कंपनियों पर घाटे का दबाव काफी बढ़ गया है।

पश्चिम एशिया संकट का भी पड़ा असर

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का भी तेल कंपनियों पर असर पड़ा। उनके मुताबिक इस वजह से 30 जून तक तेल कंपनियों को 74,781 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान झेलना पड़ा।

हालांकि उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी मजबूत रिफाइनिंग क्षमता के कारण वैश्विक संकट के बावजूद ईंधन आपूर्ति को सुचारु बनाए रखा।

कच्चे तेल की कीमतें घटीं, फिर भी क्यों बना दबाव?

मंत्री ने बताया कि अप्रैल में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 72 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई हैं। इसके बावजूद तेल कंपनियां एलपीजी की बिक्री पर अभी भी अंडर-रिकवरी की रिपोर्ट कर रही हैं।

उन्होंने समझाया कि रिफाइनरियां आमतौर पर दो महीने पहले कच्चे तेल की खरीद करती हैं। इसलिए वर्तमान में पेट्रोल पंपों पर बिक रहा ईंधन उस समय खरीदे गए महंगे कच्चे तेल से तैयार हुआ है, जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें अधिक थीं।

ईंधन कीमतों में की गई थी बढ़ोतरी

बढ़ते वित्तीय दबाव को कम करने के लिए तेल कंपनियों ने 15 मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। पेट्रोल की कीमत में 7.38 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 7.52 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था।

यह पिछले चार वर्षों में ईंधन कीमतों में पहली बड़ी बढ़ोतरी मानी गई। इसके बाद 25 मई को अंतिम बार कीमतों में संशोधन किया गया था।

क्या सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल?

हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिया कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं तो भविष्य में खुदरा ईंधन कीमतों में कटौती पर विचार किया जा सकता है।

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय बाजार की परिस्थितियों और लागत संरचना का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा।

देश के पास 80 दिन का तेल भंडार

मंत्री ने बताया कि भारत के पास वर्तमान में 24 रिफाइनरियां और 22 बंदरगाह हैं। देश में रिफाइनरियों, बंदरगाहों, टर्मिनलों और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में उपलब्ध स्टॉक को मिलाकर लगभग 76 से 80 दिनों की ईंधन आवश्यकता पूरी करने की क्षमता मौजूद है। उन्होंने कहा कि भविष्य में आपूर्ति बाधाओं से बेहतर तरीके से निपटने के लिए देश को अपनी भंडारण क्षमता और बढ़ाने की आवश्यकता है।

 

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