Monday , 5 October 2026

5 जुलाई के पंथिक सम्मेलन से पहले बड़ा विवाद! निमंत्रण और बहिष्कार पर संगठनों में फूट, सियासी रंग लेने लगे सिख मुद्दे

अमृतसर डेस्क: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से 5 जुलाई को गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में प्रस्तावित पंथिक सम्मेलन से पहले ही सिख संगठनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। सम्मेलन को लेकर जहां कुछ संगठनों ने बहिष्कार का ऐलान कर दिया है, वहीं कई संगठनों ने निमंत्रण न मिलने का आरोप लगाते हुए दूरी बना ली है।

यह सम्मेलन मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े उस विवादित मामले को लेकर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें अकाल तख्त के निर्देशों के प्रति सिख समाज को जागरूक करने की बात कही गई है। लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही यह मुद्दा धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है।

कई संगठनों ने किया बहिष्कार का ऐलान

सिख फेडरेशन भिंडरांवाला सहित कई पंथिक संगठनों ने बैठक कर सर्वसम्मति से सम्मेलन का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। संगठनों का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर सम्मेलन से दूर रखा गया और निमंत्रण पत्र नहीं भेजा गया।

संगठनों का यह भी कहना है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का मौजूदा स्वरूप राजनीतिक प्रभाव में काम कर रहा है और इस सम्मेलन का इस्तेमाल किसी राजनीतिक एजेंडे को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है।

निमंत्रण न मिलने पर उठे सवाल

कई संगठनों ने यह दावा किया है कि उन्हें सार्वजनिक रूप से सभी पंथिक संगठनों को आमंत्रित करने की बात कही गई थी, लेकिन वास्तविकता में उन्हें निमंत्रण नहीं मिला। इससे पूरे आयोजन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिरोमणि अकाली दल (पुनर्गठित) के प्रवक्ता ने भी कहा है कि उनकी पार्टी को अब तक कोई आमंत्रण नहीं मिला, जबकि पहले सभी संगठनों को शामिल करने की बात कही गई थी।

सम्मेलन का उद्देश्य और विवाद

जानकारी के अनुसार, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की सामान्य सभा में पारित प्रस्ताव के तहत मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर अकाल तख्त के निर्देशों को सिख समाज तक पहुंचाने और जागरूकता फैलाने के लिए यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।

इससे पहले अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार की ओर से भी सभी पंथिक संगठनों को इसमें शामिल होने की अपील की गई थी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह विवादित हो चुकी है।

पहले के फैसलों पर भी उठे सवाल

कुछ संगठनों ने यह भी सवाल उठाया है कि पहले लिए गए धार्मिक फैसलों पर इस तरह का जनजागरण अभियान क्यों नहीं चलाया गया। इस मुद्दे ने अब सिख संगठनों के बीच नई बहस को जन्म दे दिया है।

अब नजरें 5 जुलाई के सम्मेलन पर

मतभेद और बहिष्कार के बीच अब सभी की निगाहें 5 जुलाई को होने वाले इस पंथिक सम्मेलन पर टिक गई हैं। यह देखना अहम होगा कि किन संगठनों की भागीदारी रहती है और यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है।

 

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