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210 करोड़ रुपये की सब्सिडी, 43 हजार से ज्यादा लाभार्थी… यूपी में ईवी खरीदने वालों की हुई बल्ले-बल्ले, सरकार ने जारी किए बड़े आंकड़े

यूपी डेस्क: उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की पहल लगातार असर दिखा रही है। बढ़ती ईंधन कीमतों, प्रदूषण और ऊर्जा सुरक्षा जैसी चुनौतियों के बीच राज्य की ईवी क्रय सब्सिडी योजना लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। परिवहन विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक 96 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हो चुका है, जबकि 43 हजार से ज्यादा वाहन खरीदारों को 210 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी जा चुकी है। सरकार का मानना है कि इस योजना से वाहन खरीदने की शुरुआती लागत कम हुई है और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

210 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी खातों में पहुंची

परिवहन विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन क्रय सब्सिडी योजना के तहत पिछले लगभग तीन वर्षों में 210 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी लाभार्थियों के खातों में भेजी जा चुकी है। योजना का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को पेट्रोल और डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और तेल पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ना समय की जरूरत है। उनके मुताबिक इससे ईंधन पर होने वाला खर्च कम होगा और पर्यावरण के साथ लोगों के स्वास्थ्य को भी फायदा मिलेगा।

43 हजार से ज्यादा लोगों को मिल चुका है योजना का लाभ

विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 96,778 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण दर्ज किया गया है। इनमें 43,218 वाहन मालिकों को सब्सिडी का भुगतान किया जा चुका है। यह दर्शाता है कि योजना का लाभ बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच रहा है और प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का रुझान लगातार बढ़ रहा है। आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन और लाइव काउंटर की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे आवेदक अपने आवेदन की स्थिति आसानी से देख सकते हैं।

सबसे ज्यादा मांग इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की

ईवी क्रय सब्सिडी योजना का सबसे अधिक लाभ इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को मिला है। विभाग के अनुसार अब तक 61,417 इलेक्ट्रिक स्कूटर और मोटरसाइकिल इस योजना के दायरे में आ चुके हैं। कम कीमत, कम रखरखाव, कम चार्जिंग खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उपयुक्त होने की वजह से इनकी मांग तेजी से बढ़ी है। सरकार ने योजना के तहत दो लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को सब्सिडी देने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है, ताकि मध्यमवर्गीय परिवारों को इसका अधिक लाभ मिल सके।

कार, ई-बस और मालवाहक वाहनों को भी मिलेगा प्रोत्साहन

सरकार ने योजना का दायरा केवल निजी उपयोग तक सीमित नहीं रखा है। इसके तहत 25 हजार इलेक्ट्रिक कारों, 400 ई-बसों और 1,000 इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों को भी सब्सिडी देने का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन, व्यावसायिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाना है, जिससे प्रदूषण में कमी आने के साथ आधुनिक परिवहन व्यवस्था को भी बढ़ावा मिल सके।

इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के कई बड़े फायदे

इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिल रही है, जिससे वायु प्रदूषण घटाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल की खपत कम होने से विदेशी ईंधन पर निर्भरता भी धीरे-धीरे घट सकती है। इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन खर्च पारंपरिक वाहनों की तुलना में कम माना जाता है और रखरखाव पर भी अपेक्षाकृत कम खर्च आता है। यही कारण है कि बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों में भी इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

ईवी निर्माण और निवेश का बड़ा केंद्र बनने की तैयारी

राज्य सरकार केवल सब्सिडी तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण और निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। ईवी नीति के तहत बैटरी निर्माण, चार्जिंग स्टेशन, वाहन निर्माण इकाइयों और इससे जुड़े उद्योगों में निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य रोजगार के नए अवसर सृजित करने के साथ प्रदेश में मजबूत ईवी इकोसिस्टम विकसित करना है। पिछले कुछ वर्षों में कई कंपनियों ने राज्य में निवेश में रुचि भी दिखाई है।

चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार पर भी सरकार का फोकस

सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए मजबूत चार्जिंग ढांचा तैयार करने पर भी जोर दे रही है। सार्वजनिक स्थानों, प्रमुख शहरों, राष्ट्रीय राजमार्गों और व्यावसायिक क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि चार्जिंग सुविधाओं के विस्तार से लोगों का भरोसा और मजबूत होगा तथा लंबी दूरी की यात्रा के दौरान चार्जिंग को लेकर होने वाली चिंता भी कम होगी।

बढ़ते पंजीकरण से मजबूत हो रहा लोगों का भरोसा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग इसी गति से बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी ईवी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। लगातार बढ़ते पंजीकरण और हजारों लाभार्थियों को मिली सब्सिडी इस बात का संकेत हैं कि प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आम लोगों के परिवहन खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है।

 

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