भोपाल: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने बीजेपी की अंदरूनी राजनीति को गरमा दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने के बाद उनके समर्थक खुलकर विरोध में उतर आए हैं। करीब 33 साल लंबे राजनीतिक सफर में डबरा से लेकर दतिया तक अपनी मजबूत पकड़ बनाने वाले नरोत्तम मिश्रा कभी बीजेपी के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते थे। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर कौन हैं नरोत्तम मिश्रा, जिनके टिकट कटने से पार्टी के भीतर इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
ग्वालियर से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
नरोत्तम मिश्रा का जन्म 15 अप्रैल 1960 को ग्वालियर में हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बीजेपी युवा मोर्चा से की। छात्र राजनीति में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही और वह ग्वालियर स्टूडेंट यूनियन के सचिव रह चुके हैं। वर्ष 1998 में उन्होंने जीवाजी यूनिवर्सिटी से पीएचडी की।
1990 में डबरा से पहली बार पहुंचे विधानसभा
बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा पर भरोसा जताते हुए वर्ष 1990 में उन्हें डबरा विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा। उन्होंने पहली ही बार में जीत हासिल कर विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद 1998 और 2003 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने डबरा सीट से जीत दर्ज कर अपना राजनीतिक प्रभाव मजबूत किया।
डबरा में अपनी पकड़ बनाने के बाद उन्होंने दतिया का रुख किया। परिसीमन के बाद डबरा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई थी, जिसके बाद उन्हें अपना राजनीतिक क्षेत्र बदलना पड़ा।
दतिया में भी कायम रखा राजनीतिक वर्चस्व
नरोत्तम मिश्रा ने वर्ष 2008 में दतिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और यहां भी अपनी मजबूत पकड़ बनाई। वर्ष 2008 से 2018 तक वह लगातार दतिया सीट से विधायक रहे। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की अलग-अलग बीजेपी सरकारों में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
गृह मंत्रालय समेत कई बड़े विभाग संभाले
नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश सरकार में कई अहम विभागों के मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने गृह मंत्रालय, विधि एवं विधायी कार्य, जेल और संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। अपने बेबाक बयानों और राजनीतिक सक्रियता के कारण वह प्रदेश बीजेपी के चर्चित नेताओं में शामिल रहे।
2023 में दतिया में टूटा जीत का सिलसिला
लंबे समय तक दतिया में प्रभाव रखने वाले नरोत्तम मिश्रा को वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी की बड़ी जीत के बावजूद वह अपनी सीट नहीं बचा सके। कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती ने उन्हें करीब 7 हजार वोटों के अंतर से हराया था।
यह हार नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक सफर में बड़ा झटका मानी गई, क्योंकि इससे पहले दतिया को उनका मजबूत गढ़ माना जाता था।
उपचुनाव में उम्मीद थी वापसी की, लेकिन पार्टी ने बदला फैसला
दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे कि बीजेपी एक बार फिर नरोत्तम मिश्रा पर भरोसा जता सकती है। हालांकि पार्टी ने उनकी जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बना दिया।
बीजेपी के इस फैसले के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई और दतिया में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। अब यह देखना अहम होगा कि पार्टी का नया दांव चुनाव में कितना सफल साबित होता है।
Navyug Samachar
