मनोरंजन डेस्क: बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान एक बार फिर सुर्खियों में हैं। तीसरी शादी के बाद अब उनके खिलाफ फतवा जारी होने का दावा किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें जान से मारने की धमकी मिलने और हत्या करने वाले को 5 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा का मामला भी सामने आया है। हालांकि, इन घटनाक्रमों पर आमिर खान या उनकी पत्नी गौरी स्प्रैट की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
तीसरी शादी के बाद बढ़ा विवाद
आमिर खान ने 5 जुलाई 2026 को अपनी गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट से शादी की थी। शादी के बाद से वह लगातार सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। उनकी शादी को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आईं और सोशल मीडिया पर भी उन्हें लेकर बहस तेज हो गई।
हत्या करने वाले को 5 करोड़ रुपये देने का दावा
आमिर खान की शादी को लेकर विरोध के बीच अयोध्या के धार्मिक नेता जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने अभिनेता की हत्या करने वाले को 5 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा करने का दावा किया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसी घटना होती है तो संबंधित व्यक्ति का कानूनी खर्च भी वहन किया जाएगा।
परमहंस ने यह बयान महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे द्वारा आमिर खान को लेकर दिए गए बयान के समर्थन में दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनेता ने “लव जिहाद” को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हिंदू महिलाओं से विवाह किए। वहीं, इससे पहले नितेश राणे ने भी आमिर खान की शादी को लेकर टिप्पणी करते हुए उन्हें “लव जिहाद का ब्रांड एंबेसडर” बताया था और लोगों से उनकी फिल्मों को लेकर सोच-समझकर फैसला लेने की अपील की थी।
आमिर खान के खिलाफ फतवा जारी होने का दावा
इसी बीच मुस्लिम निजी दारुल इफ्ता के शाही मुख्य मुफ्ती मौलाना इब्राहिम हुसैन की ओर से आमिर खान की शादी को लेकर धार्मिक टिप्पणी सामने आई है। उनके अनुसार, इस्लामी शरीयत की उनकी व्याख्या के मुताबिक कोई मुस्लिम पुरुष किसी गैर-मुस्लिम महिला से तब तक विवाह नहीं कर सकता, जब तक वह इस्लाम स्वीकार न कर ले।
उन्होंने आमिर खान और गौरी स्प्रैट की शादी को गुनाह बताते हुए अभिनेता से अल्लाह के सामने तौबा करने की बात कही। उनका कहना था कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के ऐसे फैसलों से इस्लामी शिक्षाओं को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। हालांकि, आमिर खान या गौरी स्प्रैट की ओर से इस दावे पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
क्या होता है फतवा?
फतवा किसी अदालत का फैसला या कानूनी आदेश नहीं होता। इसे किसी इस्लामी विद्वान या मुफ्ती द्वारा धार्मिक प्रश्नों पर दी गई राय या मार्गदर्शन माना जाता है। फतवा का उद्देश्य इस्लामी शिक्षाओं के आधार पर धार्मिक, व्यक्तिगत या सामाजिक मामलों में सलाह देना होता है। इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी आदेश नहीं माना जाता।
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