यूपी डेस्क: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के लिए बड़ी सड़क परियोजना को मंजूरी मिल गई है। शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के उद्देश्य से 33 किलोमीटर लंबे रिंग रोड का निर्माण किया जाएगा। यह रिंग रोड कोल और गभाना तहसील क्षेत्र के 37 गांवों से होकर गुजरेगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से इस परियोजना को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है।
शहर के बाहर से गुजरेगा रिंग रोड
प्रस्तावित अलीगढ़ रिंग रोड की शुरुआत गभाना तहसील के जीटी रोड स्थित पला सल्लू क्षेत्र से होगी। इसके बाद यह कई ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरते हुए शहर के बाहरी हिस्से को जोड़ेगा और कोल तहसील के हरदुआगंज क्षेत्र में जाकर प्रमुख मार्गों से जुड़ेगा।
इस परियोजना का उद्देश्य शहर में प्रवेश करने वाले भारी और बाहरी वाहनों को वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराना है, जिससे मुख्य सड़कों पर यातायात का दबाव कम किया जा सके।
दिल्ली-आगरा-कानपुर जाने वाले यात्रियों को मिलेगा फायदा
फिलहाल दिल्ली, आगरा, कानपुर और अन्य प्रमुख शहरों की ओर जाने वाले भारी वाहन अलीगढ़ शहर के अंदर से होकर गुजरते हैं। इसके कारण शहर के प्रमुख चौराहों और व्यस्त इलाकों में जाम की स्थिति बनी रहती है।
रिंग रोड बनने के बाद दिल्ली की ओर से आने वाले वाहनों को शहर के अंदर प्रवेश करने की जरूरत नहीं होगी। वाहन सीधे बाहरी मार्ग से अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होने की उम्मीद है।
चार से छह लेन का बनाया जाएगा हाईवे
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया है कि केंद्रीय राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत अलीगढ़ रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
अधिसूचना के अनुसार, 0.00 किलोमीटर से 33.38 किलोमीटर तक के ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे खंड के निर्माण के लिए भूमि अर्जित की जाएगी। परियोजना निदेशक शेषनाथ यादव ने अधिसूचना जारी होने की पुष्टि की है।
जाम और प्रदूषण से राहत की उम्मीद
अलीगढ़ शहर में लंबे समय से रिंग रोड की मांग की जा रही थी। परियोजना पूरी होने के बाद शहरवासियों को जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही शहर के अंदर वाहनों की संख्या कम होने से प्रदूषण में भी कमी आ सकती है।
फिलहाल भांकरी से बौनेर तक बना बाईपास दिल्ली की ओर से आने वाले वाहनों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल होता है। यहां से आगरा, मथुरा, एटा, कानपुर और लखनऊ की ओर जाने वाले वाहन शहर के बाहरी हिस्से से होकर गुजरते हैं।
इन 37 गांवों से होकर गुजरेगा रिंग रोड
रिंग रोड पला सल्लू, कोरह रुस्तमपुर, कोइल, सांगौर, गिरधरपुर, खेड़िया हैवत खां, कलुआ, दाउदपुर कोटा, सुम्मेरपुर, समस्तपुर कोटा, अमरौली, कस्तरी वैश्य, पला मजरा कस्तरी वैश्य, चन्दोखा, छेरत सुडियाल, साथा, खेरूपुरा, सपेरा भानपुर, किढ़ारा, जटपुरा, बरौठ, मोरथल, मोहनपुर, नयाबांस नरेन्द्रगढ़ी, आजमाबाद माछुआ, सिकन्दरपुर माछुआ, खान आलमपुर, इमलानी, मई, महमूदपुर जमालपुर, चंगेरी, भोजपुर, अलहदादपुर, पनैठी, अदौन, जलूपुर सिहोर, बरौठा और हरदुआगंज गांवों से होकर गुजरेगा।
37 गांवों में जमीन से जुड़े कामों पर रोक
रिंग रोड परियोजना की अधिसूचना जारी होने के बाद प्रशासन ने प्रभावित 37 गांवों में भूमि से जुड़े कई कार्यों पर रोक लगा दी है। अब इन गांवों में भूमि उपयोग परिवर्तन, बैनामा, नामांतरण, कॉलोनी विकास, बंधक और विनिमय जैसी प्रक्रियाओं के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की अनुमति लेना जरूरी होगा।
प्रशासन ने कोल और गभाना तहसील के एसडीएम, तहसीलदार, उप निबंधक और एआईजी स्टांप को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी अतुल गुप्ता के अनुसार, जमीन से जुड़े मामलों में पहले एनएचएआई से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा। इससे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने और मुआवजे से जुड़े विवादों को रोकने में मदद मिलेगी।
Navyug Samachar
