
यूपी डेस्क: उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की मुहिम ने नई रफ्तार पकड़ ली है। राज्य सरकार के प्रयासों के बीच साल 2026 के मध्य तक लखनऊ ने सूरत को पीछे छोड़ते हुए देश की सबसे बड़ी रूफटॉप सोलर राजधानी का दर्जा हासिल कर लिया है। राजधानी में रूफटॉप सोलर पैनलों की संख्या 1.02 लाख के पार पहुंच चुकी है। वहीं देश में हर महीने होने वाले कुल सोलर इंस्टॉलेशन में अकेले उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है।
उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इसे केवल एक सरकारी योजना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि व्यापक जनभागीदारी और स्थानीय स्तर पर सक्रिय क्रियान्वयन के जरिए अभियान का रूप दिया। इसी रणनीति का असर अब प्रदेश के कई शहरों में दिखाई देने लगा है।
1.02 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन के साथ लखनऊ सबसे आगे
राजधानी लखनऊ में रूफटॉप सोलर पैनलों का आंकड़ा 1,02,000 से अधिक हो चुका है। इसके साथ ही शहर ने सूरत को पीछे छोड़कर देश की रूफटॉप सोलर कैपिटल का स्थान हासिल किया है। प्रदेश का प्रदर्शन इस स्तर तक पहुंचा है कि देश के कुल मासिक सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है।
जमीनी स्तर पर चलाया गया अभियान बना सफलता की वजह
सरकार ने सौर ऊर्जा अपनाने के लिए स्थानीय स्तर पर कई कदम उठाए। स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया के दौरान लोगों को सोलर पैनल लगाने के लिए भी प्रेरित किया गया। 700 से अधिक रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों को अभियान से जोड़ा गया। स्कूली बच्चों के माध्यम से भी परिवारों तक जागरूकता पहुंचाई गई। इसके अलावा लखनऊ नगर निगम ने सोलर पैनल लगाने वाले संपत्ति मालिकों को प्रॉपर्टी टैक्स में 10 प्रतिशत तक की छूट देने की व्यवस्था की।
600 से बढ़कर 6,000 तक पहुंचा सोलर वेंडर नेटवर्क
प्रदेश में सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए वेंडर नेटवर्क को भी तेजी से मजबूत किया गया। विभिन्न संस्थानों में सेमिनार आयोजित किए गए और वेंडर्स के साथ नियमित समन्वय स्थापित किया गया। इसके परिणामस्वरूप राज्य में सोलर वेंडर्स की संख्या करीब 600 से बढ़कर 6,000 तक पहुंच गई। इन वेंडर्स ने घर-घर पहुंचकर लोगों को सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रेरित किया।
सब्सिडी और रियायती ऋण से आसान हुआ निवेश
सौर ऊर्जा को आम लोगों की पहुंच में लाने में सब्सिडी की बड़ी भूमिका रही। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत मिलने वाली केंद्रीय सहायता के साथ राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये तक की अतिरिक्त सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे 3 किलोवाट क्षमता वाले सोलर सिस्टम की लागत का एक बड़ा हिस्सा कम हो जाता है। इसके अलावा 6 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध रियायती बैंक ऋण ने भी लोगों के लिए सोलर सिस्टम लगवाना आसान बनाया है।
अब सिर्फ बड़े घरों तक सीमित नहीं रही सोलर ऊर्जा
सौर ऊर्जा का लाभ अब केवल बड़े मकानों या संपन्न परिवारों तक सीमित नहीं है। छोटे कारोबारियों और आम लोगों के बीच भी इसकी स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी है। कम बिजली खर्च और दीर्घकालिक बचत के कारण सोलर सिस्टम अब आर्थिक रूप से लाभदायक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
व्यावसायिक क्षेत्र और ग्रामीण जिलों में अभी भी चुनौती
हालांकि सौर ऊर्जा के विस्तार के बावजूद कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सोलर सिस्टम अपनाने की गति अपेक्षाकृत धीमी बताई गई है। वहीं भौगोलिक असमानता भी सामने आई है। जहां लखनऊ में एक लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो चुके हैं, वहीं श्रावस्ती जैसे कुछ जिलों में यह संख्या एक हजार से भी कम है। ऐसे क्षेत्रों में वेंडर नेटवर्क और आवश्यक ढांचे को मजबूत करने की जरूरत बनी हुई है।
Navyug Samachar