Friday , 2 October 2026

Lucknow Fire Case: ‘लाक्षागृह’ बनी इमारत पर बुलडोजर कार्रवाई का 26.14 लाख रुपये खर्च, अब भवन मालिक से होगी रिकवरी

यूपी डेस्क: लखनऊ के अलीगंज स्थित उस अवैध व्यावसायिक भवन को ध्वस्त करने में हुए खर्च की वसूली की तैयारी शुरू हो गई है, जहां 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड में 15 बच्चों की मौत हो गई थी। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण, सुरक्षा और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर हुए कुल 26,14,212 रुपये के खर्च का हिसाब तैयार कर लिया है। अब भवन मालिक को रिकवरी नोटिस जारी किया जाएगा।

ध्वस्तीकरण पर 26.14 लाख रुपये का खर्च

लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, उपाध्यक्ष के निर्देश पर अभियंत्रण, विद्युत-यांत्रिक, सुरक्षा और जनसंपर्क अनुभाग ने ध्वस्तीकरण में हुए कुल खर्च का आकलन किया है। इसके अनुसार भवन को गिराने और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर 26,14,212 रुपये खर्च हुए हैं।

प्राधिकरण का कहना है कि यह राशि नियमानुसार भवन स्वामी से वसूल की जाएगी। इसके लिए रिकवरी नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

22 जून को अग्निकांड में 15 बच्चों की हुई थी मौत

यह हादसा अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित एक अवैध व्यावसायिक भवन में हुआ था, जहां कोचिंग और एनिमेशन सेंटर संचालित किए जा रहे थे। 22 जून को लगी भीषण आग में 15 बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य बच्चे झुलस गए थे। कुछ बच्चों ने जान बचाने के लिए भवन से छलांग लगा दी थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

अवैध निर्माण पर पहले भी हुई थी कार्रवाई

प्रवर्तन जोन-4 के जोनल अधिकारी के अनुसार, यह अवैध व्यावसायिक निर्माण वीरेन्द्र शुक्ला, सुरेन्द्र शुक्ला और अन्य लोगों द्वारा कराया गया था। अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने भवन को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया था।

अधिकारियों का कहना है कि ध्वस्तीकरण का पूरा खर्च पहले प्राधिकरण ने वहन किया था, लेकिन अब नियमानुसार इसकी वसूली भवन स्वामी से की जाएगी।

नोटिस के बाद होगी कानूनी कार्रवाई

एलडीए के मुताबिक, अवैध निर्माण को गिराने का खर्च संबंधित पक्ष से वसूलने की नीति पहले से लागू है। ध्वस्तीकरण आदेश के दौरान स्थल पर चस्पा किए गए नोटिस में भी इसका उल्लेख किया गया था।

यदि भवन स्वामी निर्धारित राशि जमा नहीं करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फायर एनओसी की नई शर्त पर व्यापारियों की आपत्ति

उधर, इस घटना के बाद गैर-आवासीय भवनों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य किए जाने के फैसले पर उद्योग व्यापार मंडल ने आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि वर्तमान स्वरूप में इस नियम को लागू करने से शहर के हजारों पुराने व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर संकट खड़ा हो सकता है।

व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि वे किसी भी प्रकार की लापरवाही का समर्थन नहीं करते, लेकिन पुराने बाजारों में दशकों पहले बने भवनों पर मौजूदा तकनीकी मानकों को लागू करना व्यवहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

 

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