
नेशनल डेस्क: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर जारी छात्र आंदोलन फिलहाल खत्म नहीं होगा। राज्य सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच हुई पहली औपचारिक वार्ता सकारात्मक माहौल में संपन्न हुई, लेकिन छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। साथ ही सरकार को चेतावनी दी गई है कि मांगों पर संतोषजनक फैसला नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सरकार के मंत्रियों के पैनल से हुई पहली बैठक
सरकार की ओर से गठित चार सदस्यीय मंत्रियों के पैनल ने स्टेट गेस्ट हाउस में 10 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। इस पैनल में चमरा लिंडा, सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह और संजय प्रसाद यादव शामिल रहे। बैठक के दौरान छात्रों ने अपनी मांगों और परीक्षा से जुड़े मुद्दों को विस्तार से सरकार के सामने रखा।
वार्ता के बाद छात्रों ने क्या कहा
बैठक समाप्त होने के बाद छात्र प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख चेहरों में शामिल रवींद्र पासवान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पहली बैठक सकारात्मक वातावरण में हुई। उन्होंने बताया कि मंत्रियों के साथ चर्चा के दौरान परिवार जैसा माहौल महसूस हुआ। उनका कहना था कि छात्रों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार युवाओं की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द कोई ठोस निर्णय लेगी।
वार्ता से पहले ही स्पष्ट कर दिया था रुख
मंत्रियों के पैनल से मुलाकात के लिए रवाना होने से पहले रवींद्र पासवान ने प्रदेश के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा था कि 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पूरे राज्य के छात्रों की आवाज बनकर सरकार के सामने जा रहा है। उन्होंने साफ कहा था कि सभी मांगें महत्वपूर्ण हैं और यदि सरकार किसी एक मांग को भी स्वीकार करने से इनकार करती है तो बातचीत को सफल नहीं माना जाएगा। ऐसी स्थिति में आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा।
लिखित आश्वासन मिलने तक नहीं खत्म होगा धरना
छात्र आंदोलन की कोर कमेटी के सदस्यों का कहना है कि सरकार की ओर से लिखित या मजबूत आश्वासन मिलने तक धरना-प्रदर्शन समाप्त नहीं किया जाएगा। अब छात्र प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री स्तर से आने वाले फैसले का इंतजार कर रहा है। छात्र नेताओं ने यह भी कहा है कि यदि सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा मार्च पर दोबारा विचार किया जा सकता है। वहीं, मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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