
यूपी डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह में डिग्री और मेडल हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं को नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं दीं। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह के साथ उनके जीवन की एक नई यात्रा शुरू हो रही है। प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि भले ही सभी के रास्ते और सपने अलग-अलग हों, लेकिन देश की प्रगति में योगदान देने का लक्ष्य साझा होना चाहिए।
हर छात्र का रास्ता और सपना अलग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों की मंजिल अलग-अलग हो सकती है। कोई अपने पहले स्टार्टअप का सपना देख रहा होगा, तो कोई अगली प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करेगा। कुछ छात्र नौकरी की राह चुनेंगे, जबकि कुछ शोध या कारोबार की दुनिया में कदम रखेंगे।
उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के करियर और भविष्य की योजनाएं अलग हो सकती हैं। प्रधानमंत्री ने छात्रों को याद दिलाया कि आईआईटी दिल्ली में बिताए वर्षों के दौरान मिली सीख और अनुभव उनके जीवनभर साथ रहेंगे।
ओरिएंटेशन से दीक्षांत तक का सफर
प्रधानमंत्री ने छात्रों को आईआईटी दिल्ली में उनके पहले दिन की याद भी दिलाई। उन्होंने कहा कि जब छात्रों ने संस्थान में कदम रखा होगा, तब शायद उन्हें लगा होगा कि अभी तो ओरिएंटेशन हुआ है, लेकिन देखते ही देखते दीक्षांत समारोह का दिन आ गया।
उन्होंने कहा कि ओरिएंटेशन से कॉन्वोकेशन तक का सफर उपलब्धियों और अनुभवों से भरा रहा है। अब छात्रों के जीवन में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।
आज के खास पल को पूरी तरह जीने की सलाह
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों से कहा कि वे दीक्षांत समारोह के इस खास पल को पूरी तरह जिएं और आईआईटी दिल्ली से जुड़ी यादों को संजोकर रखें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जब उनके कंधों पर बड़ी जिम्मेदारियां होंगी, तब संस्थान से जुड़ी पुरानी यादें उन्हें फिर से ऊर्जा देने का काम करेंगी।
प्रधानमंत्री ने हॉस्टल जीवन और दोस्तों के साथ बिताए समय का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इंटर-हॉस्टल प्रतियोगिताएं, दोस्तों के साथ बिताए पल और छोटी-बड़ी नोकझोंक ऐसी यादें हैं, जिन्हें छात्र लंबे समय तक अपने साथ रखेंगे।
कुमाऊं से हिमाद्रि तक, हॉस्टल की यादों का जिक्र
प्रधानमंत्री ने आईआईटी दिल्ली के अलग-अलग हॉस्टलों का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों के पास कुमाऊं, आरा, कारा, नील, कैलाश और हिमाद्रि जैसे हॉस्टलों से जुड़ी अपनी-अपनी यादें होंगी। उन्होंने छात्रों से कहा कि संस्थान से विदाई लेने से पहले वे इन यादों को एक बार फिर जरूर याद करें।
देश की प्रगति में योगदान की जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को संदेश दिया कि आईआईटी से निकलने के बाद उनकी जिम्मेदारी केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करने तक सीमित नहीं है। देश की प्रगति, नवाचार और समाज के विकास में उनकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि उनके सपने और करियर की दिशा भले अलग-अलग हों, लेकिन राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने का उद्देश्य साझा होना चाहिए। दीक्षांत समारोह छात्रों के लिए केवल डिग्री हासिल करने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन के एक नए सफर की शुरुआत है।
Navyug Samachar