
उत्तर प्रदेश डेस्क: उत्तर प्रदेश की सियासत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग फिर तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने शुक्रवार को योगी सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि प्रदेश सरकार ने ₹7,000 करोड़ से अधिक की रकम ‘कॉस्मेटिक फेशियल’ पर खर्च कर दी। उनका आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश की जमीनी तस्वीर के बजाय सरकार की चमकदार छवि पेश करने के लिए किया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर इस कथित खर्च को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि टैक्स से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल ऐसी छवि बनाने में किया जा रहा है, जो प्रदेश की वास्तविक स्थिति से अलग है।
‘गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहा यूपी’
सपा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गरीबी और बेरोजगारी के साथ आर्थिक सुस्ती और किसानों से जुड़े न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसे मुद्दे अब भी गंभीर हैं। उन्होंने बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने कथित खर्च को बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय बताया। उनका कहना है कि इतनी बड़ी रकम का इस्तेमाल प्रदेश के विकास और युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता था।
‘₹7,000 करोड़ से बनते 2-3 वर्ल्ड क्लास विश्वविद्यालय’
अखिलेश यादव ने दावा किया कि अगर यही पैसा शिक्षा के क्षेत्र में लगाया जाता तो उत्तर प्रदेश में दो से तीन विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय स्थापित किए जा सकते थे। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में केजी से पीजी और शोध तक की शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकती थी, जिससे प्रदेश के बच्चों और युवाओं के भविष्य को नई दिशा मिलती।
सपा प्रमुख ने कहा कि ऐसी पहल से उत्तर प्रदेश को विकास और समृद्धि की राह पर आगे बढ़ाया जा सकता था। उन्होंने ‘न्यू इंडिया’ की तर्ज पर ‘नियो इंडिया’ के निर्माण की बात भी कही।
बीजेपी ने अखिलेश के आरोपों पर किया पलटवार
अखिलेश यादव के आरोपों पर बीजेपी एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की अलग-अलग कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का प्रचार सूचना विभाग के माध्यम से किया जाता है। उनके मुताबिक, सरकारी योजनाओं का प्रचार कोई नई परंपरा नहीं है, बल्कि लंबे समय से इसका हिस्सा रहा है।
विजय बहादुर पाठक ने कहा कि सरकारी योजनाओं के प्रचार में मुख्यमंत्री की तस्वीर का इस्तेमाल होना स्वाभाविक है। इसका उद्देश्य योजनाओं और सरकार के कामकाज की जानकारी लोगों तक पहुंचाना है।
बीजेपी एमएलसी ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हुए प्रचार-प्रसार को भी देखना चाहिए।
2027 चुनाव से पहले फिर आमने-सामने सपा और बीजेपी
अखिलेश यादव के ₹7,000 करोड़ के आरोप और बीजेपी के जवाब के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा और बीजेपी के बीच सरकारी योजनाओं, खर्च और विकास के मॉडल को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़ रहे हैं।
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