यूपी डेस्क: प्रयागराज से सामने आए एक अहम मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति की मृत्यु के बाद विधवा द्वारा गोद लिए गए बच्चे के संपत्ति में अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर विधवा पति की मौत के बाद कानूनी तरीके से किसी बच्चे को गोद लेती है, तो उस बच्चे को केवल महिला का बेटा नहीं माना जाएगा, बल्कि वह मृतक पति का भी पुत्र माना जाएगा। ऐसी स्थिति में उसे मृतक पति की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार मिल सकता है।
पति की मौत के बाद विधवा ने लिया था बच्चा गोद
यह मामला प्रयागराज से जुड़ा है। राम कृपाल ने साल 1983 में याचिका दाखिल कर उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मोती रानी और उनके दिवंगत पति मुरलीधर के गोद लिए बेटे रामजी को मुरलीधर की संपत्ति का उत्तराधिकारी माना गया था।
मामले के अनुसार, मुरलीधर की मृत्यु के समय उनकी कोई संतान नहीं थी। उनके निधन के बाद उनकी संपत्ति में हिस्सा उनकी पत्नी मोती रानी को मिला था। इसके बाद रामजी ने दावा किया कि मोती रानी ने उन्हें 2 अगस्त 1960 को विधिवत गोद लेने के विलेख के जरिए अपना पुत्र बनाया था। इसी आधार पर उन्होंने मुरलीधर की संपत्ति में उत्तराधिकार का दावा किया।
चकबंदी अधिकारी के आदेश को हाईकोर्ट में दी गई चुनौती
राम कृपाल ने चकबंदी अधिकारी के उस आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था, जिसमें रामजी को मुरलीधर की संपत्ति का उत्तराधिकारी माना गया था।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति चंद्र कुमार राय ने की। अदालत ने 30 जुलाई को दिए अपने फैसले में राम कृपाल की याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने माना कि चकबंदी अधिकारियों ने रामजी को मोती रानी और मुरलीधर के गोद लिए हुए पुत्र के रूप में उत्तराधिकार देने में कोई कानूनी गलती नहीं की थी।
सुप्रीम कोर्ट के सावन राम मामले का दिया हवाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के सावन राम बनाम कलावंती मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। इसी कानूनी आधार पर अदालत ने माना कि पति की मृत्यु के बाद विधवा द्वारा लिया गया गोद का बच्चा मृतक पति का भी पुत्र माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने सुभाष मिसिर मामले में दिए गए एक अन्य फैसले का भी उल्लेख किया। उसमें भी यह माना गया था कि विधवा द्वारा गोद लिया गया बेटा उसके मृतक पति का पुत्र माना जाएगा और विधवा की मृत्यु के बाद वह पति की संपत्ति का वैध उत्तराधिकारी होगा।
हाईकोर्ट ने उत्तराधिकार के अधिकार को किया स्पष्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि इसमें पति की मृत्यु के बाद विधवा द्वारा कानूनी रूप से गोद लिए गए बच्चे के उत्तराधिकार के अधिकार को स्पष्ट किया गया है।
अदालत के अनुसार, यदि विधवा पति की मृत्यु के बाद कानून के मुताबिक किसी बच्चे को गोद लेती है, तो उस बच्चे को मृतक पति का भी बेटा माना जाएगा। ऐसी स्थिति में वह पति की संपत्ति में उत्तराधिकार का दावा कर सकता है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने राम कृपाल की याचिका खारिज कर दी और रामजी को मुरलीधर की संपत्ति में उत्तराधिकार दिए जाने के आदेश को बरकरार रखा।
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