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सावन शिवरात्रि पर क्यों खास है भोलेनाथ की पूजा? जानें सही विधि, उपाय और किन बातों का रखें ध्यान

नेशनल डेस्क: सावन की शिवरात्रि भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष मानी जाती है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव की पूजा, अभिषेक, मंत्र जाप और व्रत करने से जीवन की परेशानियां दूर करने में मदद मिल सकती है। मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का प्राकट्य हुआ था और इसी दिन उनके विवाह की भी मान्यता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि आती है, लेकिन सावन में पड़ने वाली शिवरात्रि का महत्व विशेष माना जाता है।

सावन शिवरात्रि पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा?

सावन शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करके भगवान शिव की पूजा का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर सबसे पहले जल अर्पित करें। श्रद्धालु इसके बाद दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक कर सकते हैं। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।

रात में भगवान शिव की स्तुति या रुद्राष्टक का पाठ भी किया जा सकता है। जो भक्त चार पहर पूजा करते हैं, वे पहले पहर में दूध, दूसरे पहर में दही, तीसरे पहर में घी और चौथे पहर में शहद से अभिषेक कर सकते हैं। प्रत्येक पहर में शिवलिंग पर जल अर्पित करने की मान्यता है।

धन-समृद्धि के लिए क्या करें?

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार धन संबंधी परेशानियों से राहत के लिए शिवरात्रि के दिन दूध, दही, शहद, शक्कर और घी से भगवान शिव का अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद शिवलिंग पर जल की धारा अर्पित करें और भगवान शिव से धन-समृद्धि की प्रार्थना करें।

संतान सुख के लिए करें यह उपाय

संतान सुख की इच्छा रखने वाले श्रद्धालु शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर घी अर्पित करने के बाद जल चढ़ा सकते हैं। इसके बाद भगवान शिव से संतान सुख की कामना करने की मान्यता है। यह उपाय श्रद्धा और विश्वास के साथ करने की बात कही गई है।

विवाह में देरी हो रही है तो क्या करें?

जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है, वे शिवरात्रि के दिन अपनी आयु के बराबर बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं। प्रत्येक बेलपत्र चढ़ाते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करने की मान्यता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा को विवाह संबंधी बाधाओं के लिए शुभ माना गया है।

नौकरी और रोजगार के लिए उपाय

मनचाही नौकरी या रोजगार की इच्छा रखने वाले लोग शिवरात्रि के दिन शिवलिंग का जल से अभिषेक कर सकते हैं। इसके बाद शिव मंदिर में 11 घी के दीपक जलाकर भगवान शिव से अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करने की मान्यता है।

स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य और आरोग्य की कामना रखने वाले श्रद्धालु शिवलिंग पर इत्र अर्पित करने के बाद जल चढ़ा सकते हैं। इसके बाद मंदिर में बैठकर ‘ॐ जूं सः माम पालय पालय’ मंत्र का 11 माला जाप करने की मान्यता है। संभव हो तो इस दिन रुद्राक्ष धारण भी किया जा सकता है।

इन बातों का रखें ध्यान

शिवरात्रि की पूजा में श्रद्धा और नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान शिव का अभिषेक करते समय स्वच्छता का ध्यान रखें और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-अर्चना करें। अलग-अलग परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा की विधि में अंतर हो सकता है।

नोट: यहां बताए गए उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपाय नहीं माना जाना चाहिए।

 

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