Monday , 5 October 2026

आंदोलन के आगे झुकी महाराष्ट्र सरकार! ST छात्रों पर प्रदर्शन की रोक हटाई, उम्र सीमा भी 30 साल हुई

महाराष्ट्र डेस्क: महाराष्ट्र में सरकारी आदिवासी छात्रावासों में रहने वाले ST छात्रों के विरोध के बाद राज्य सरकार ने अपने फैसले में बदलाव किया है। सरकार ने छात्रावासों में रहने वाले छात्रों के आंदोलन, भूख हड़ताल और विरोध मार्च में शामिल होने पर लगाया गया स्पष्ट प्रतिबंध वापस ले लिया है। इसके साथ ही छात्रावास में प्रवेश की अधिकतम उम्र सीमा 26 वर्ष से बढ़ाकर 30 वर्ष कर दी गई है।

सरकार का यह फैसला 5 अगस्त को जारी किए गए सरकारी आदेश के खिलाफ राज्यभर में शुरू हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद आया है। नए आदेश से पहले जारी प्रस्ताव में पहली बार ST छात्रावासों में रहने वाले छात्रों के लिए भूख हड़ताल, विरोध मार्च और इस तरह की गतिविधियों में भाग लेने पर स्पष्ट रोक लगाई गई थी। साथ ही छात्रावास में प्रवेश के लिए अधिकतम उम्र 26 वर्ष तय की गई थी, जबकि इससे पहले लागू नियमों में ऐसी कोई आयु सीमा नहीं थी।

1,000 से ज्यादा छात्रों ने किया था विरोध

5 अगस्त का आदेश सामने आने के बाद ST छात्रों में नाराजगी बढ़ गई। नागपुर में गुरुवार से 1,000 से अधिक छात्रों ने जनजातीय विकास विभाग के अतिरिक्त आयुक्त कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। इसके अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में भी छात्रों ने सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया।

जनजातीय विकास विभाग के अधिकारियों का कहना था कि विरोध-प्रदर्शन पर रोक लगाने का उद्देश्य छात्रावासों में शैक्षणिक माहौल बनाए रखना और छात्रों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित करना था। हालांकि, छात्रों ने इस प्रावधान का विरोध करते हुए इसे उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार में हस्तक्षेप बताया।

गोंदिया के देवरी की छात्रा मैना सलामे ने कहा कि छात्रावासों में छात्राओं से जुड़ी शिकायतों का कई बार वार्डन स्तर पर समाधान नहीं हो पाता। ऐसी परिस्थितियों में छात्र संगठनों की मदद लेनी पड़ती है और जरूरत पड़ने पर अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन करना भी जरूरी हो जाता है।

सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के बाद बदला आदेश

छात्रों के लगातार विरोध के बीच सरकार ने बातचीत का रास्ता अपनाया। गुरुवार को जनजातीय विकास विभाग के सचिव विजय वाघमारे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए छात्रों से बातचीत की। इसके बाद शुक्रवार को जनजातीय विकास मंत्री अशोक उइके ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ करीब एक घंटे बैठक की।

बैठक के बाद सरकार ने संशोधित सरकारी प्रस्ताव जारी किया। इसमें छात्रावासों में रहने वाले छात्रों के आंदोलन, भूख हड़ताल और विरोध मार्च में शामिल होने पर लगाए गए स्पष्ट प्रतिबंध को हटा दिया गया। इसके साथ ही छात्रावास में प्रवेश की अधिकतम उम्र सीमा को 26 वर्ष से बढ़ाकर 30 वर्ष कर दिया गया।

30 साल की उम्र सीमा को लेकर सरकार ने दिया था ये तर्क

विभाग ने पहले 26 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा का बचाव करते हुए कहा था कि सामान्य तौर पर ST छात्र इस उम्र तक डिग्री, डिप्लोमा या स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम पूरा कर लेते हैं। विभाग के मुताबिक, जिन छात्रों को छात्रावास में जगह नहीं मिलती, वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वयं योजना का लाभ ले सकते हैं। इस योजना में अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष है।

अब सरकार ने छात्रों की मांग को ध्यान में रखते हुए सरकारी ST छात्रावासों में प्रवेश के लिए भी उम्र सीमा 30 वर्ष कर दी है।

छात्रों की एक बड़ी मांग अभी बाकी

सरकार के फैसले के बाद भी ST छात्रों का आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। छात्रों की प्रमुख मांग अब भी छात्रावास में प्रवेश के लिए उम्र सीमा को पूरी तरह समाप्त करने की है।

एक प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा कि छात्रों का आंदोलन जारी रहेगा और आगे की रणनीति जल्द तय की जाएगी।

संशोधित सरकारी प्रस्ताव के मुताबिक, महाराष्ट्र में कुल 494 सरकारी ST छात्रावास स्वीकृत हैं। इनमें से 490 छात्रावास फिलहाल संचालित हो रहे हैं। 5 अगस्त को जारी किया गया आदेश इन छात्रावासों से जुड़े पुराने सरकारी प्रस्तावों को एक जगह समेकित करने के उद्देश्य से लाया गया था। हालांकि, विवादित प्रावधानों के खिलाफ छात्रों के व्यापक विरोध के बाद सरकार को अपने फैसले में बदलाव करना पड़ा।

 

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