
नेशनल डेस्क: नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की मौजूदा परीक्षा व्यवस्था पर कई अहम सवाल उठाए। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था को केवल सुरक्षा उपायों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसके लिए मजबूत और स्थायी संस्थागत ढांचा जरूरी है। कोर्ट ने NTA में DG, ADG और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति से लेकर साइबर सुरक्षा, गोपनीय ढांचे, स्वतंत्र डेटाबेस और डेटा भंडारण से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी भी मांगी।
परीक्षा व्यवस्था में स्थायी विशेषज्ञता पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था के पास स्थायी विशेषज्ञता और पर्याप्त अनुभव होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रत्येक परीक्षा से मिलने वाले अनुभव का इस्तेमाल अगली परीक्षा की व्यवस्था को और सुरक्षित बनाने में किया जाना चाहिए।
प्रश्नपत्र की सुरक्षा को लेकर सॉलिसिटर जनरल ने दी जानकारी
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी सुरक्षा से जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि करीब 500 सवालों के प्रश्न बैंक से चार प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं। इनमें से दो प्रश्नपत्रों का चयन DG NTA करते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रश्नपत्रों की छपाई सीसीटीवी और सीआईएसएफ की निगरानी में होती है। प्रश्नपत्रों को ले जाने वाली गाड़ियों की जीपीएस के जरिए निगरानी की जाती है। दो सेट प्रश्नपत्र स्ट्रांग रूम में रखे जाते हैं और परीक्षा के दिन DG NTA तय करते हैं कि इनमें से कौन सा प्रश्नपत्र इस्तेमाल किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जाती है।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह सिर्फ कागजी व्यवस्था का सवाल नहीं
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि राधाकृष्णन समिति ने इसे सही तरीके से एक प्रणालीगत समस्या बताया है। अदालत के मुताबिक, इस समस्या को संस्थागत रूप देने की जरूरत है और यही इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पीठ ने कहा कि कागज पर प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित दिखाई देती है, लेकिन एक परीक्षा समाप्त होने और अगली परीक्षा आने के बीच परिस्थितियां पूरी तरह बदल सकती हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत और प्रभावी बनाए रखने के लिए स्थायी संस्थागत तंत्र जरूरी है।
तीन हफ्ते में केंद्र से मांगा हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसकी मुख्य चिंता यह है कि पूरी परीक्षा व्यवस्था को स्थायी और संस्थागत रूप किस तरह दिया जाएगा। अदालत ने NEET को सुरक्षित बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों को लेकर केंद्र सरकार से तीन हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी।
क्या है राधाकृष्णन समिति?
NEET-UG प्रश्नपत्र लीक होने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2024 में परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने और NTA की संरचना तथा कार्यप्रणाली में बदलाव के लिए सिफारिशें देने के उद्देश्य से सात सदस्यीय राधाकृष्णन समिति का गठन किया था।
इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित इस समिति का गठन 22 जून 2024 को किया गया था। समिति ने 21 अक्टूबर 2024 को अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी थी। इसमें परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था NTA में बड़े स्तर पर बदलाव की सिफारिश की गई थी।
वहीं, इस साल पेपर लीक की घटनाओं और छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार ने NEET परीक्षाओं में संरचनात्मक सुधारों के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक उच्चाधिकार प्राप्त कार्य बल का भी गठन किया है।
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