Tuesday , 8 September 2026

महुआ मोइत्रा की बढ़ी मुश्किलें! नदिया कोर्ट ने जारी किया गिरफ्तारी वारंट, जानें क्या है पूरा मामला

नेशनल डेस्क: तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पश्चिम बंगाल के नदिया जिले की कृष्णानगर तृतीय न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने एक शिकायत मामले में समन के बावजूद पेश नहीं होने पर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। नदिया जिला पुलिस अधीक्षक अतुल वी. ने भी वारंट जारी होने की पुष्टि की है। मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 227 के तहत दायर शिकायत से जुड़ा बताया गया है।

कई बार समन के बाद भी अदालत में नहीं हुईं पेश

पुलिस के मुताबिक, शिकायत मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने महुआ मोइत्रा को कई बार समन जारी किया था। निर्धारित प्रक्रिया के तहत समन जारी होने के बावजूद जब वह अदालत में पेश नहीं हुईं तो न्यायालय ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया।

इन धाराओं के तहत दर्ज है मामला

शिकायत में महुआ मोइत्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं का उल्लेख किया गया है। इनमें धारा 79 के तहत महिला की मर्यादा का अपमान, धारा 196 के तहत विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देना, धारा 299 के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, धारा 351 के तहत आपराधिक धमकी और धारा 353(2) के तहत सार्वजनिक अशांति फैलाने या लोक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले बयान देने अथवा उनका प्रसार करने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

नदिया पुलिस ने क्या कहा?

नदिया के पुलिस अधीक्षक अतुल वी. ने कहा कि शिकायत मामले में अदालत की ओर से निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है और उसी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है।

वहीं, महुआ मोइत्रा ने इससे पहले नदिया प्रशासन पर अपमानजनक आचरण का आरोप लगाया था। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष नदिया जिले के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस भी दायर किया है। इसमें उन्होंने संसदीय प्रोटोकॉल के उल्लंघन और अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया है।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला 14 अगस्त की घटना से जुड़ा है। विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रशासन की ओर से देर रात नदिया सर्किट हाउस खाली करने के लिए कहा गया। महुआ मोइत्रा के मुताबिक, वह 14 अगस्त को शाम करीब 6:15 बजे सर्किट हाउस पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि उन्हें उनका नियमित कमरा दिया गया था और वहां चाय तथा भोजन भी परोसा गया।

महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि रात 9:47 बजे अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने उन्हें फोन कर परिसर खाली करने के लिए कहा। उनके मुताबिक, फोन पर कथित तौर पर बताया गया कि यह निर्देश “ऊपर से” आया है। इसके बाद डिप्टी कलेक्टर की ओर से उन्हें व्हाट्सऐप संदेश भेजा गया, जिसमें 12 अगस्त का एक आदेश था। इस आदेश में रखरखाव और सफाई कार्य का हवाला दिया गया था।

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