
महाराष्ट्र डेस्क: गणेशोत्सव के दौरान महाराष्ट्र के अकोला में ‘राजा के गणपति’ पंडाल की अनोखी झांकी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. गोरक्षण रोड स्थित इस पंडाल में गणपति बप्पा की भव्य प्रतिमा के सामने उनके वाहन मूषक राज को अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत किया गया है. कहीं मूषक आरती करते नजर आ रहे हैं, तो कहीं ताल-मृदंग और ढोल बजाते हुए भक्ति में लीन दिखाई दे रहे हैं.
मूषक राज के अलग-अलग रूपों ने खींचा ध्यान
‘राजा के गणपति’ पंडाल में तैयार की गई झांकी में भगवान गणेश के वाहन मूषक राज को अलग-अलग रूपों में दिखाया गया है. झांकी में कुछ मूषक आरती करते नजर आते हैं, जबकि कुछ ताल-मृदंग और ढोल बजाते हुए दिखाई दे रहे हैं.
वहीं, झांकी में कुछ मूषक नृत्य करते हुए भी नजर आते हैं. दो मूषक गणपति बप्पा को पालकी में विराजमान कर उनकी शोभायात्रा निकालते दिखाई दे रहे हैं. पालकी में विराजमान बप्पा और उनके साथ चल रहे मूषक राज का यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बना हुआ है.
पूरी झांकी में भक्ति के साथ गणेशोत्सव की पारंपरिक झलक भी देखने को मिल रही है. अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत किए गए मूषक राज श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं.
दो साल से नहीं किया जा रहा गणपति विसर्जन
‘राजा के गणपति’ पंडाल की खास पहल केवल अनोखी झांकी तक सीमित नहीं है. पंडाल समिति ने जल प्रदूषण को रोकने के लिए पिछले दो वर्षों से गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन नहीं करने का फैसला लिया है.
समिति ने आगे भी प्रतिमा का विसर्जन नहीं करने का निर्णय लिया है. पंडाल अध्यक्ष सुधीर रांदल और अन्य पदाधिकारियों की ओर से पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है.
गणेशोत्सव की आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली पंडाल समिति की यह पहल भी श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.
Navyug Samachar