Saturday , 26 September 2026

दवाइयां और जांच हिंदी में लिखें डॉक्टर, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने लिखा पत्र; भोजपुरी-अवधी में संवाद की भी अपील

यूपी डेस्क: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने डॉक्टरों से मरीजों के लिए दवाइयों और जांचों के नाम हिंदी या देवनागरी लिपि में लिखने की अपील की है। उन्होंने डॉक्टरों के नाम दो पेज का हाथ से लिखा हिंदी पत्र जारी किया है और इसे सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी साझा किया। पाठक ने कहा कि डॉक्टर अगर मरीजों से भोजपुरी, अवधी या उनकी मातृभाषा में संवाद करेंगे तो उन्हें चिकित्सकीय सलाह बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।

ब्रजेश पाठक ने अपने पत्र की शुरुआत ‘राष्ट्र नायकों की अभिलाषा, चले देश में देशज भाषा’ पंक्ति से की। इसके बाद उन्होंने डॉक्टरों से दवाओं और जांचों के नाम हिंदी या देवनागरी लिपि में लिखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे मरीज को यह समझने में आसानी होगी कि वह कौन सी दवा ले रहा है। पाठक ने यह भी लिखा कि वह निजी तौर पर उन दवाओं को प्राथमिकता देंगे, जिनके नाम हिंदी में लिखे होंगे।

हिंदी में काम करने वाले डॉक्टरों के सम्मान की बात

ब्रजेश पाठक ने पत्र में कहा कि आज हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान का नारा देने वाले एकात्म मानव दर्शन के प्रतिपादक और राष्ट्रवादी चिंतक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती है। उन्होंने इसे पवित्र लोक पर्व बताते हुए कहा कि इस दिन भारतीय भाषाओं, खास तौर पर हिंदी के अधिक से अधिक इस्तेमाल का संकल्प लिया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि वह हिंदी का प्रयोग करने वाले डॉक्टरों का सम्मान करेंगे।

भोजपुरी, अवधी या मातृभाषा में संवाद की अपील

स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों से मरीजों के साथ उनकी मातृभाषा में संवाद करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि डॉक्टर भोजपुरी या अवधी में मरीजों से बातचीत करेंगे तो मरीज उनकी बात को ज्यादा आसानी से समझ पाएंगे। इससे चिकित्सकीय व्यवस्था में मरीजों को लाभ मिलेगा।

पत्र में पाठक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विदेशों में भी हिंदी और भारतीय भाषाओं में जनसंवाद करते हैं। उन्होंने डॉक्टरों से महापुरुषों, उनके कार्यों और उनकी सोच से प्रेरणा लेने की अपील की।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के लेख का किया जिक्र

ब्रजेश पाठक ने कहा कि उपमुख्यमंत्री या चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि एक राष्ट्रप्रेमी भारतीय के नाते वह चिकित्सकों से हिंदी को बढ़ावा देने का आग्रह कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि यह विचार उन्हें पंडित दीनदयाल उपाध्याय का 22 अप्रैल 1963 को पांचजन्य में प्रकाशित लेख पढ़ने के बाद अनायास आया।

सुभाष चंद्र बोस और दयानंद सरस्वती का दिया उदाहरण

पाठक ने अपने पत्र में लिखा कि लोकतंत्र लोक लाज और लोक भाषा से मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को मजबूत करने से स्वतः सशक्त होगी।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद सरकार की राष्ट्रीय भाषा हिंदी घोषित की थी। वहीं, गुजराती मूल के दयानंद सरस्वती ने हिंदी के प्रचार के लिए अपना जीवन समर्पित किया था।

 

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