
नई दिल्ली: एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink को भारत में व्यावसायिक मंजूरी मिलने में हो रही देरी का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। सिंधिया ने पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस को खुद नहीं पता कि उसे किस दिशा में जाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस दिया है, लेकिन व्यावसायिक परिचालन शुरू करने से पहले सभी निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
राहुल गांधी और एलन मस्क के बीच कैसे शुरू हुआ विवाद?
विवाद उस समय बढ़ा जब SpaceX के प्रमुख एलन मस्क ने भारत में Starlink की व्यावसायिक सेवाएं शुरू होने में देरी पर सवाल उठाए। मस्क ने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह अपनी बाजार में मजबूत स्थिति बनाए रखने के लिए उनकी कंपनी के प्रवेश में बाधा डाल रहे हैं। हालांकि, शुरुआती आरोप में उन्होंने किसी कारोबारी समूह का नाम नहीं लिया था।
इसके बाद मस्क ने सोशल मीडिया मंच X पर सवाल उठाया कि क्या मुकेश अंबानी भारत के असली बॉस हैं। उन्होंने दावा किया कि Starlink को 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिल चुका है और उनकी कंपनी पिछले पांच वर्षों से भारत के कानूनों तथा सरकारी आवश्यकताओं का पालन कर रही है। इसके बावजूद भारत में व्यावसायिक सेवा शुरू करने की अनुमति मिलने में देरी क्यों हो रही है, इस पर उन्होंने सवाल उठाया।
मस्क की टिप्पणी पर राहुल गांधी ने तंज कसते हुए लिखा, ‘भारत में आपका स्वागत है, एलन। अभी आप दूसरे शख्स के बारे में जानेंगे तो…’ राजनीतिक हलकों में राहुल की इस टिप्पणी को गौतम अडानी की ओर इशारे के रूप में देखा गया। इसके बाद मस्क ने राहुल गांधी को जवाब देते हुए मौजूदा स्थिति को चिंताजनक बताया।
सिंधिया ने कांग्रेस की रणनीति पर उठाए सवाल
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी एक कंपनी को विशेष लाभ देने या जानबूझकर रोकने का सवाल नहीं है। उनके मुताबिक, चर्चा केवल Starlink तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि सरकार तीन कंपनियों को सैटकॉम सेवाओं के लिए लाइसेंस जारी कर चुकी है।
सिंधिया ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी पहले इस बात पर सवाल उठा रही थी कि किसी खास कंपनी को लाइसेंस क्यों दिया गया, जबकि अब वही कंपनी की ओर से उठाए जा रहे सवालों का समर्थन कर रही है। उन्होंने कांग्रेस के रुख को विरोधाभासी बताते हुए पार्टी की राजनीतिक दिशा पर सवाल खड़े किए।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी कंपनी को लाइसेंस जारी होना और उसे व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की अंतिम अनुमति मिलना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। कंपनियों को सुरक्षा मानकों और अन्य नियामकीय शर्तों का पालन करना होगा।
Starlink समेत तीन कंपनियों को मिला सैटेलाइट संचार का लाइसेंस
केंद्र सरकार के अनुसार, भारत में सैटेलाइट आधारित संचार सेवाओं के लिए तीन कंपनियों को संबंधित लाइसेंस जारी किए गए हैं। इनमें शामिल हैं:
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Starlink Satellite Communications Private Limited — एलन मस्क की SpaceX की भारतीय इकाई।
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Jio Satellite Communications Limited — रिलायंस समूह की सैटेलाइट संचार इकाई।
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OneWeb India Communications Private Limited — Eutelsat OneWeb से जुड़ी भारतीय इकाई।
संचार मंत्रालय ने 8 अक्टूबर को कहा कि देश का सैटकॉम नियामकीय ढांचा निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण है। मंत्रालय के मुताबिक, तीनों कंपनियां सुरक्षा आकलन की प्रक्रिया से गुजर रही हैं और सभी को निर्धारित शर्तें पूरी करनी होंगी।
सरकार ने उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया कि कारोबारी समूहों के दबाव में Starlink की भारत में शुरुआत रोकी जा रही है। सरकार का कहना है कि सभी कंपनियों के लिए नियम समान हैं और किसी को भी आवश्यक प्रक्रियाओं से छूट नहीं दी जा सकती।
लाइसेंस मिलने के बाद भी क्यों शुरू नहीं हुई Starlink की सेवा?
Starlink को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस के अलावा कई अन्य प्रक्रियाएं पूरी करनी हैं। इनमें सुरक्षा मंजूरी, स्पेक्ट्रम आवंटन और परिचालन से संबंधित नियामकीय शर्तें शामिल हैं।
सरकार के अनुसार, सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद ही कंपनियां स्पेक्ट्रम आवंटन की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी। स्पेक्ट्रम के लिए शुल्क तय करने में राजस्व आधारित व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। इसके बाद अन्य जरूरी अनुमतियां पूरी होने पर कंपनियां व्यावसायिक सेवाएं शुरू कर सकती हैं।
यही वजह है कि लाइसेंस मिलना सेवा शुरू करने की अंतिम मंजूरी नहीं माना जाता। Starlink का मामला इसी प्रक्रिया को लेकर चर्चा में है। कंपनी की ओर से देरी पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि सरकार सुरक्षा और नियामकीय शर्तों को अनिवार्य बता रही है।
जियो और एयरटेल से भी है सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में मुकाबला
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट का बाजार केवल Starlink तक सीमित नहीं है। रिलायंस जियो और भारती एयरटेल से जुड़ी कंपनियां भी इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं। जियो की सैटेलाइट संचार इकाई को लाइसेंस मिल चुका है, जबकि एयरटेल से जुड़ी OneWeb भी इस बाजार का हिस्सा है।
सैटेलाइट इंटरनेट के माध्यम से दूरदराज के गांवों, पहाड़ी इलाकों, सीमावर्ती क्षेत्रों और ऐसे स्थानों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां फाइबर नेटवर्क या मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना मुश्किल है। इसी कारण इस क्षेत्र में कारोबारी प्रतिस्पर्धा के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा नियंत्रण और समान नियामकीय व्यवस्था भी अहम मुद्दे हैं।
फिलहाल केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी कंपनियों को निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। राहुल गांधी और एलन मस्क की टिप्पणियों के बाद Starlink की भारत में शुरुआत का मुद्दा अब कारोबारी प्रतिस्पर्धा के साथ राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बन गया है।
Navyug Samachar