करियर डेस्क: जिंदगी में कई बार असफलता और लोगों के ताने इंसान को तोड़ने के बजाय कुछ बड़ा करने की प्रेरणा दे देते हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले विपुल पांडे की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने पर उनकी योग्यता पर सवाल उठाए गए, लेकिन उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया। यूपीएससी और पीसीएस समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल होने के बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी। करीब सात साल के संघर्ष के बाद उन्होंने यूपीपीसीएस 2024 की परीक्षा में सफलता हासिल की और असिस्टेंट कमिश्नर के पद के लिए चयनित हुए।
साधारण परिवार से आते हैं विपुल पांडे
विपुल पांडे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले हैं। उनका परिवार सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखता है। एक वीडियो में उन्होंने बताया था कि उनके पिता सिंचाई विभाग में सर्वेयर के पद पर कार्यरत थे, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं।
विपुल की शुरुआती रुचि इंजीनियरिंग में थी। उनके दो बड़े भाई भी बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे और वह भी इसी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते थे। हालांकि, परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि सभी की इंजीनियरिंग की पढ़ाई का खर्च आसानी से उठाया जा सके। ऐसे में उन्होंने पहले डिप्लोमा किया और फिर बरेली की रोहिलखंड यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई पूरी की।
कोचिंग में मिला ताना, तभी लिया अफसर बनने का फैसला
विपुल जब डिप्लोमा कर रहे थे, उस दौरान वह कोचिंग में बच्चों को पढ़ाते भी थे। वहां सीबीएसई बोर्ड के कुछ विद्यार्थी भी आते थे। विपुल ने हिंदी माध्यम से पढ़ाई की थी। उनके मुताबिक, एक दिन कोचिंग में पढ़ने वाले एक बच्चे के पिता ने उनकी अंग्रेजी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जब वह हिंदी माध्यम से पढ़े हैं और अंग्रेजी नहीं बोल पाते, तो बच्चों को कैसे पढ़ाते हैं।
विपुल ने जवाब में कहा कि हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले कई लोग भी आईपीएस और पीसीएस अधिकारी बने हैं। इस पर उस अभिभावक ने कहा कि वह खुद तो आईएएस या पीसीएस अधिकारी नहीं हैं।
उस समय विपुल की उम्र करीब 18 से 19 साल थी। यह टिप्पणी उन्हें इतनी बुरी लगी कि वह कोचिंग से बाहर आकर रोने लगे। लेकिन इसी घटना ने उनके भीतर प्रशासनिक अधिकारी बनने की इच्छा को मजबूत कर दिया। उन्होंने तय कर लिया कि अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर वह खुद को साबित करेंगे।
दिल्ली में शुरू की तैयारी, लगातार सात साल तक किया संघर्ष
बीटेक पूरा करने के बाद विपुल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली पहुंचे। वहां उन्होंने एक कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। साल 2018 से उन्होंने यूपीपीसीएस के साथ हरियाणा और उत्तराखंड जैसी राज्य सिविल सेवा परीक्षाओं पर भी ध्यान देना शुरू किया।
इस दौरान उन्हें बार-बार असफलता का सामना करना पड़ा। कभी प्रारंभिक परीक्षा में तो कभी मुख्य परीक्षा में उनका चयन नहीं हो पाया। उत्तराखंड पीसीएस की एक परीक्षा में वह महज 0.01 अंक से चूक गए। बार-बार नतीजे पक्ष में नहीं आने और चयन से बाहर होने के संदेश ने उनकी मुश्किलें बढ़ाईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दिल्ली से बरेली तक का सफर तय करते हुए भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी।
रेलवे स्टेशन पर गुजारी रातें, बुखार में भी नहीं छोड़ी पढ़ाई
विपुल की तैयारी का दौर कई कठिनाइयों से भरा रहा। उन्होंने बताया कि संघर्ष के दिनों में कई रातें रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर जागकर गुजारनी पड़ीं। एक परीक्षा के बाद निराशा इतनी बढ़ गई थी कि उन्होंने अपना प्रश्नपत्र तक फाड़ दिया था।
कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने खुद को संभालने की कोशिश जारी रखी। बुखार होने पर भी वह पढ़ाई करते रहे। जब निराशा हावी होने लगी, तब उनके भाई ने उन्हें हौसला दिया। उन्होंने विपुल को बड़े लक्ष्य के साथ छोटे-छोटे पड़ावों पर भी ध्यान देने की सलाह दी। इस प्रेरणा ने उन्हें दोबारा अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की।
UPPCS 2024 में मिली सफलता, बने असिस्टेंट कमिश्नर
लगातार मेहनत और कई साल के इंतजार के बाद विपुल पांडे को आखिरकार सफलता मिली। उन्होंने यूपीपीसीएस 2024 की परीक्षा पास की और अंतिम चयन सूची में उन्हें असिस्टेंट कमिश्नर का पद मिला।
विपुल के मुताबिक, परिणाम आने का पल उनके लिए बेहद खास था। उन्होंने इसे ऐसा जवाब बताया, जिसने उनकी काबिलियत पर सवाल उठाने वाले लोगों को चुप करा दिया। उनकी कहानी बताती है कि शुरुआती परिस्थितियां, भाषा का माध्यम या लगातार मिलने वाली असफलताएं किसी व्यक्ति की मंजिल तय नहीं करतीं। लक्ष्य के प्रति लगन और मुश्किल दौर में डटे रहने की क्षमता आगे बढ़ने में अहम भूमिका निभाती है।
Navyug Samachar
