Saturday , 7 November 2026

शरद पवार अस्पताल से डिस्चार्ज, अब 10 नवंबर के बाद होगी बड़ी बातचीत! क्या फिर एक होंगे NCP के दोनों गुट?

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद पवार को शनिवार, 7 नवंबर को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल से छुट्टी मिल गई। 85 वर्षीय शरद पवार की तबीयत में सुधार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें घर पर रहकर उपचार जारी रखने की सलाह दी है। अब राजनीतिक गलियारों की निगाहें 10 नवंबर के बाद होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हैं। प्रफुल्ल पटेल के साथ उनकी प्रस्तावित मुलाकात को दोनों गुटों के भविष्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

ब्रोंकाइटिस और सीने में संक्रमण से बिगड़ी थी तबीयत

डॉक्टर प्रतीत समदानी के मुताबिक, शरद पवार को ब्रोंकाइटिस का अटैक आया था और उनके सीने में संक्रमण भी हो गया था। उपचार के बाद उनकी सेहत में सुधार हुआ है और दवाओं का असर भी सकारात्मक रहा है। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति स्थिर होने के बाद अस्पताल से छुट्टी देने का फैसला किया। फिलहाल उन्हें घर पर ही इलाज जारी रखने, पर्याप्त आराम करने और उम्र को देखते हुए अतिरिक्त सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।

पुणे से मुंबई तक चला इलाज, दो अस्पतालों में हुए भर्ती

शरद पवार को सबसे पहले 2 नवंबर को पुणे के रुबी हॉल क्लिनिक में भर्ती कराया गया था। उन्हें लगातार खांसी और सीने में दर्द की शिकायत थी। शुरुआती जांच और उपचार के बाद उनकी हालत स्थिर हुई, जिसके चलते 4 नवंबर को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

हालांकि, उसी दिन आगे की जांच और बेहतर उपचार के लिए उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर रख रही थी। शुक्रवार को भी चिकित्सकों ने उनकी स्थिति स्थिर बताई थी। उपचार के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद शनिवार को उन्हें अस्पताल से घर भेज दिया गया।

प्रफुल्ल पटेल से डेढ़ घंटे की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल

शरद पवार के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान हुई एक मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। दरअसल, 5 नवंबर को अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता और एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल उनसे मिलने ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंचे थे। दोनों नेताओं के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई थी।

इस मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें शरद पवार प्रफुल्ल पटेल से 10 नवंबर के बाद बैठकर बातचीत करने की बात कहते सुनाई दिए। इसके बाद दोनों गुटों के बीच संभावित राजनीतिक समझौते और विलय की अटकलें तेज हो गईं।

प्रफुल्ल पटेल ने भी मुलाकात की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच महाराष्ट्र और देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल पहुंचने का मुख्य उद्देश्य शरद पवार का हालचाल जानना था। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक रूप से अलग रास्तों पर होने के बावजूद दोनों के बीच व्यक्तिगत और पारिवारिक रिश्ते कायम हैं।

क्या फिर एक होगी एनसीपी? 2023 में दो हिस्सों में बंटी थी पार्टी

महाराष्ट्र में एनसीपी के दोनों गुटों के एक होने की चर्चा काफी समय से चल रही है। साल 2023 में अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से राजनीतिक रूप से अलग होकर पार्टी में अलग गुट बना लिया था। इसके बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दो हिस्सों में बंट गई।

शरद पवार के नेतृत्व वाला गुट एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के नाम से महाविकास अघाड़ी का हिस्सा बना, जबकि अजित पवार का गुट बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन में शामिल हो गया।

हालांकि, 28 जनवरी 2026 को विमान हादसे में अजित पवार की मौत के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनने लगे। उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने पार्टी की कमान संभाली और राज्य की उपमुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद से दोनों गुटों के भविष्य और संभावित एकीकरण को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं।

सुनील तटकरे के बयान से विलय की अटकलों को मिला जोर

एनसीपी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने भी दोनों गुटों के विलय को लेकर अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर अजित पवार जीवित होते तो दोनों गुटों का विलय 12 फरवरी को ही हो चुका होता।

तटकरे के इस बयान के बाद राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला। एनसीपी (एसपी) के नेता रोहित पवार भी दावा कर चुके हैं कि अजित पवार दोनों गुटों को फिर से एक साथ लाना चाहते थे।

हालांकि, इन बयानों के बावजूद दोनों गुटों के विलय को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार के बीच प्रस्तावित बातचीत को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अमित शाह से मुलाकात के बाद पार्टी के भीतर उठे सवाल

एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में हुई मुलाकात ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को हवा दी है। बताया गया कि इस बैठक में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

हालांकि, पार्टी की मौजूदा अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ तथा जय पवार इस बैठक में शामिल नहीं हुए। उनकी गैरमौजूदगी के बाद पार्टी के नेतृत्व, संगठन और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे।

कुछ रिपोर्टों में दोनों एनसीपी गुटों के संभावित विलय और बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में आगे की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा होने की बात भी सामने आई। हालांकि, पार्टी की ओर से किसी औपचारिक विलय की घोषणा नहीं की गई है।

पीएम मोदी ने फोन कर जाना था शरद पवार का हाल

शरद पवार की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 4 नवंबर को उन्हें फोन कर स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उन्हें पर्याप्त आराम करने, यात्राएं कम करने और खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी थी।

शरद पवार के करीबी विट्ठल मणियार के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान सुप्रिया सुले की राजनीतिक जिम्मेदारियां संभालने की क्षमता का भी जिक्र किया था।

इससे पहले अगस्त में सुप्रिया सुले और एनसीपी (एसपी) के अन्य सांसदों ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। हालांकि, सांसदों ने उस मुलाकात को महाराष्ट्र के विकास और क्षेत्रीय मुद्दों से जुड़ी बातचीत बताया था।

10 नवंबर के बाद किस दिशा में बढ़ेगी महाराष्ट्र की राजनीति?

फिलहाल शरद पवार के अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा 10 नवंबर के बाद प्रफुल्ल पटेल के साथ प्रस्तावित बातचीत को लेकर है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि 10 नवंबर को किसी औपचारिक विलय बैठक या फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। दोनों नेताओं के बीच इस तारीख के बाद बैठकर बातचीत करने की बात सामने आई है।

अगर यह बातचीत आगे बढ़ती है और दोनों गुटों के बीच सहमति बनती है तो महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शरद पवार और अजित पवार के समर्थक फिर एक मंच पर आएंगे? क्या सुनेत्रा पवार और प्रफुल्ल पटेल इस दिशा में आगे बढ़ने को तैयार होंगे? और अगर दोनों गुटों का विलय होता है तो नई पार्टी की कमान किसके हाथ में होगी?

इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की सियासत के लिए अहम साबित हो सकते हैं। फिलहाल शरद पवार की सेहत में सुधार के साथ ही उनकी अगली राजनीतिक रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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