Saturday , 7 November 2026

व्यापारी से अवैध वसूली के आरोप में बड़ा एक्शन! पहले लिपिक निलंबित, अब डिप्टी कमिश्नर पर गिरी गाज

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी में राज्य कर विभाग के अधिकारियों पर व्यापारी को छापेमारी और विभागीय कार्रवाई का डर दिखाकर कथित तौर पर अवैध वसूली मांगने का मामला सामने आने के बाद शासन ने सख्त कदम उठाया है। विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) के डिप्टी कमिश्नर संजीव निरंजन को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। उन्हें राज्य कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। इससे पहले इसी मामले में विभाग के एक लिपिक को निलंबित किया जा चुका है। अब पूरे प्रकरण की जांच जिलाधिकारी विशाख जी को सौंपी गई है।

डीएम विशाख जी करेंगे पूरे मामले की जांच, 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें 15 दिनों के भीतर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करके विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

जांच में व्यापारी से कथित अवैध वसूली की मांग, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और विभागीय स्तर पर हुई गतिविधियों की पड़ताल की जाएगी। जिलाधिकारी की रिपोर्ट मिलने के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ राज्य कर आयुक्त से की गई शिकायत

मिली जानकारी के मुताबिक, एक व्यापारी को छापेमारी और विभागीय कार्रवाई का डर दिखाकर कथित तौर पर पैसे मांगने का मामला सामने आया था। व्यापारी ने इस संबंध में सीधे राज्य कर आयुक्त नितिन बंसल से मुलाकात कर गोपनीय शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत के साथ व्यापारी ने बातचीत की कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी साक्ष्य के तौर पर सौंपी थी। इस शिकायत के सामने आने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक स्तर पर मिले तथ्यों के आधार पर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच का दायरा बढ़ाया गया।

लिपिक विकास वर्मा पहले ही हो चुके हैं निलंबित

इस मामले में कार्रवाई की शुरुआत एसआईबी के लिपिक विकास वर्मा के निलंबन से हुई थी। प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद विभाग ने उनके खिलाफ कार्रवाई की थी।

इसके बाद जब मामले की गहराई से पड़ताल शुरू हुई तो एसआईबी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई। इसी क्रम में डिप्टी कमिश्नर संजीव निरंजन को उनके पद से हटाकर राज्य कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया।

जांच रिपोर्ट के बाद और अधिकारियों पर भी गिर सकती है गाज

व्यापारी से कथित अवैध वसूली के इस मामले में शासन ने अब जांच को प्राथमिकता पर रखने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी विशाख जी को 15 दिन की समयसीमा के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है।

जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर विभाग के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। फिलहाल इस पूरे मामले में शासन की नजर जांच रिपोर्ट पर है। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि कथित वसूली प्रकरण में किन-किन लोगों की भूमिका सामने आती है और आगे कितने कर्मचारियों पर कार्रवाई होती है।

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