Sunday , 9 August 2026

राम मंदिर FIR पर अखिलेश का बड़ा हमला! बोले- पहले सबूत साफ किए गए, फिर दर्ज हुआ मुकदमा

यूपी डेस्क : अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद सियासी घमासान और तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुकदमा दर्ज होने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए भाजपा सरकार और जांच एजेंसियों पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एफआईआर दर्ज करने से पहले विशेष जांच दल (एसआईटी) के नाम पर सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

‘फुनगी को फांसी, शाखाओं को माफी’ कहकर साधा निशाना

एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही समय बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक पुरानी कहावत का हवाला देते हुए लिखा, “भाजपा राज में नाइंसाफी की यही झांकी दिखेगी, फुनगी को फांसी और शाखाओं को माफी।” इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में केवल छोटे स्तर के लोगों को आरोपी बनाया जा रहा है, जबकि कथित तौर पर बड़े और प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

एसआईटी जांच की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

सपा प्रमुख ने कहा कि आम जनता के बीच यह चर्चा है कि एफआईआर दर्ज होने से पहले एसआईटी जांच के बहाने संभावित सबूतों को साफ किया गया होगा। उन्होंने दावा किया कि पहले यह तय किया गया होगा कि किन लोगों को बचाना है और किन्हें आरोपी बनाना है, उसके बाद मुकदमा दर्ज किया गया।

अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि जांच का निष्कर्ष पहले ही तय कर लिया गया होगा और बाद में उसी आधार पर जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।

चढ़ावा विवाद को सबसे पहले उठाया था सपा ने

राम मंदिर चढ़ावा मामले को सबसे पहले समाजवादी पार्टी ने सार्वजनिक रूप से उठाया था। आरोप लगाए जाने के बाद यह मुद्दा लगातार राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा। इसके बाद कई विपक्षी दलों, साधु-संतों और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया था। एसआईटी ने कई दिनों तक दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।

एफआईआर में ट्रस्ट पदाधिकारियों का नाम नहीं होने पर उठे सवाल

गुरुवार को दर्ज एफआईआर में आठ लोगों को नामजद किया गया है, लेकिन जिन ट्रस्ट पदाधिकारियों पर विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा था, उनके नाम मुकदमे में शामिल नहीं हैं। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष हमलावर है।

अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि जिन लोगों पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए जा रहे थे, उनके नाम एफआईआर में क्यों नहीं हैं। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की।

संजय सिंह ने भी उठाए सवाल

इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एफआईआर में कुछ प्रमुख नामों के शामिल न होने पर सवाल उठाए और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चिंता जताई। साथ ही उन्होंने एसआईटी को कुछ दस्तावेज और कथित साक्ष्य भी सौंपे हैं, जिनकी जांच की मांग की जा रही है।

एफआईआर के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

राम मंदिर चढ़ावा मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं। एक तरफ जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष सरकार और जांच प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।

 

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