Saturday , 15 August 2026

घर बनाने से पहले जरूर जान लें ये बात! अधम और सिंहमुखी जमीन क्यों मानी जाती है अशुभ, वास्तु में बताया गया बड़ा कारण

नई दिल्ली : अपना घर बनाना हर व्यक्ति का सपना होता है। लोग वर्षों की मेहनत और बचत के बाद अपने आशियाने का निर्माण कराते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार केवल घर बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिस जमीन पर घर बनाया जा रहा है उसका चयन भी बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि भूमि की प्रकृति और आकार भविष्य में घर के वातावरण और वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर प्रभाव डाल सकता है।

इसी वजह से घर निर्माण से पहले भूमि की जांच और उसके स्वरूप को समझना जरूरी माना जाता है। वास्तु शास्त्र में कुछ प्रकार की जमीन को घर बनाने के लिए शुभ माना गया है, जबकि कुछ भूमि ऐसी भी हैं जिन पर निर्माण से बचने की सलाह दी जाती है।

क्या होती है अधम भूमि?

वास्तु शास्त्र में अधम भूमि को घर निर्माण के लिए अशुभ बताया गया है। ऐसी जमीन की पहचान करने के लिए एक पारंपरिक परीक्षण का उल्लेख मिलता है। इसके तहत भूमि के उत्तर दिशा वाले हिस्से में लगभग एक से डेढ़ फीट गहरा गड्ढा खोदा जाता है और निकाली गई मिट्टी को उसी गड्ढे में दोबारा भरा जाता है।

मान्यता के अनुसार यदि गड्ढा भरने के बाद मिट्टी बच जाए तो भूमि शुभ मानी जाती है। वहीं यदि गड्ढा पूरी तरह भरने के लिए मिट्टी कम पड़ जाए तो उसे अधम भूमि कहा जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसी जमीन पर घर बनाने से बचना चाहिए।

सिंहमुखी भूमि क्यों नहीं मानी जाती शुभ?

वास्तु शास्त्र में भूमि के आकार को भी विशेष महत्व दिया गया है। जिस जमीन का अगला हिस्सा चौड़ा और पिछला हिस्सा संकरा होता है, उसे सिंहमुखी भूमि कहा जाता है।

वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार की भूमि को आवासीय निर्माण के लिए शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि ऐसी जमीन पर बने घर में रहने वाले लोगों के जीवन में अस्थिरता, तनाव और मानसिक अशांति बढ़ सकती है। इसी कारण घर निर्माण के लिए सिंहमुखी भूमि से बचने की सलाह दी जाती है।

इन स्थानों के आसपास भी नहीं बनाना चाहिए घर

वास्तु शास्त्र के अनुसार श्मशान घाट, वीरान क्षेत्रों या किसी पुराने खंडहर के आसपास घर बनाना भी उचित नहीं माना जाता। मान्यता है कि ऐसे स्थानों के निकट नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक हो सकता है, जो घर के वातावरण को प्रभावित कर सकता है।

गौमुखी भूमि को माना गया है शुभ

वास्तु मान्यताओं के अनुसार जिस जमीन का अगला हिस्सा संकरा और पिछला हिस्सा चौड़ा होता है, उसे गौमुखी भूमि कहा जाता है। घर निर्माण के लिए इस प्रकार की भूमि को शुभ माना गया है। माना जाता है कि ऐसी जमीन पर बना घर सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक होता है।

हालांकि वास्तु शास्त्र से जुड़ी ये मान्यताएं पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं। घर निर्माण से पहले भूमि की कानूनी स्थिति, भू-वैज्ञानिक जांच, जल निकासी व्यवस्था और अन्य व्यावहारिक पहलुओं की भी विशेषज्ञों से जांच कराना आवश्यक है।

 

Check Also

सितंबर में महाकालेश्वर से मांडू तक घूमने का मौका, 5 दिन के हवाई टूर में ये सब शामिल; जानें पूरा किराया

यूपी डेस्क: सितंबर 2026 में घूमने का मन बना रहे यात्रियों के लिए आईआरसीटीसी ने …