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यूपी में शिक्षा सुधार का बड़ा फैसला! योगी सरकार ने बदली एआरपी व्यवस्था, हर ब्लॉक में बनेगी नई अकादमिक टीम

यूपी डेस्क : उत्तर प्रदेश में बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देने के लिए योगी सरकार ने अकादमिक रिसोर्स पर्सन्स (एआरपी) व्यवस्था का व्यापक पुनर्गठन किया है। नई व्यवस्था के तहत ब्लॉक स्तर पर शैक्षणिक सहयोग तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, जिससे विद्यालयों में शिक्षण गुणवत्ता, शिक्षक प्रशिक्षण और विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सुधार को नई गति मिलेगी।

प्रदेश सरकार की ओर से जारी शासनादेश में एआरपी के चयन, प्रशिक्षण, कार्यदायित्व, मूल्यांकन और जवाबदेही से जुड़े विस्तृत प्रावधान निर्धारित किए गए हैं। इसके साथ ही सभी जिलों को जुलाई तक रिक्त एआरपी पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।

हर ब्लॉक में बनेगी विशेष अकादमिक सहायता टीम

नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक विकासखंड में पांच चयनित एआरपी और एक डायट मेंटर मिलकर शैक्षणिक सहायता टीम का गठन करेंगे। यह टीम विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को मजबूत करने, शिक्षकों को सतत मार्गदर्शन देने और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए कार्य करेगी।

इसके अलावा कक्षा-कक्ष में आने वाली शैक्षणिक चुनौतियों के समाधान, नवीन शिक्षण तकनीकों के उपयोग और बेहतर अधिगम वातावरण विकसित करने में भी यह टीम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

एआरपी चयन प्रक्रिया में किए गए बड़े बदलाव

सरकार ने चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और योग्यता आधारित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब एआरपी पद के लिए ऐसे शिक्षक भी आवेदन कर सकेंगे जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष शेष हैं। पहले यह सीमा दस वर्ष थी।

इसके साथ ही अब केवल चुनिंदा विषयों तक पात्रता सीमित नहीं रहेगी, बल्कि किसी भी विषय के परिषदीय शिक्षक आवेदन कर सकेंगे। चयन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए माइक्रो टीचिंग की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब चयन केवल लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा।

जिला स्तर पर गठित चयन समिति पूरी प्रक्रिया का संचालन करेगी, जिससे चयन प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और समयबद्ध बनाया जा सके।

निपुण भारत मिशन को मिलेगा जमीनी समर्थन

सरकार का मानना है कि एआरपी व्यवस्था का पुनर्गठन निपुण भारत मिशन को जमीनी स्तर पर मजबूत आधार प्रदान करेगा। बालवाटिका से लेकर कक्षा पांच तक बच्चों में आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान विकसित करने के लक्ष्य को हासिल करने में यह व्यवस्था अहम भूमिका निभाएगी।

एआरपी विद्यालयों में गतिविधि आधारित शिक्षण, शिक्षण-सामग्री के प्रभावी उपयोग, प्रिंट-समृद्ध वातावरण और बेहतर कक्षा प्रबंधन को बढ़ावा देंगे। साथ ही शिक्षकों को डिजिटल संसाधनों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के उपयोग में भी सहयोग प्रदान करेंगे।

प्रदर्शन के आधार पर तय होगा कार्यकाल

नई व्यवस्था में जवाबदेही को विशेष महत्व दिया गया है। एआरपी का कार्यकाल उनके प्रदर्शन के आधार पर तय होगा और नियमित मूल्यांकन के बाद ही कार्यकाल विस्तार का निर्णय लिया जाएगा। इससे शैक्षणिक नेतृत्व में प्रतिस्पर्धा, जवाबदेही और उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सरकार ने एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स के लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों का भी प्रावधान किया है, ताकि वे बदलती शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी भूमिका बेहतर तरीके से निभा सकें।

विद्यालय स्तर तक पहुंचेगा शिक्षा सुधार का लाभ

प्रदेश में पहले से संचालित निपुण भारत मिशन, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा, बालवाटिका और विद्यालय कायाकल्प जैसे कार्यक्रमों को नई एआरपी व्यवस्था से अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद है। ब्लॉक स्तर पर मजबूत अकादमिक सहयोग तंत्र विकसित होने से शिक्षकों को निरंतर मार्गदर्शन मिलेगा और विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में सुधार आएगा।

सरकार का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्रत्येक बच्चे तक पहुंचाना है और नई एआरपी व्यवस्था को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

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