
नेशनल डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत की उम्मीद जगा दी है। इस समझौते के तहत रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और व्यापारिक गतिविधियों को सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों पर पड़ सकता है, जहां पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल आपूर्ति में सुधार और वैश्विक बाजार में स्थिरता आने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम होगा, जिससे भारत को कई स्तरों पर फायदा मिल सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल होने वाले तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देश सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर अपने ऊर्जा निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से आयात करता है। ऐसे में इस मार्ग के सामान्य होने से तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कम होने की उम्मीद है।
युद्ध के बाद बढ़ी थीं तेल कीमतें
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद फरवरी में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। जहां पहले तेल 70 से 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वहीं संकट के दौरान इसकी कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।
अब युद्धविराम और समझौते की खबर के बाद बाजार में सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत में गिरावट दर्ज की गई है और यह करीब 84 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया है।
पेट्रोल-डीजल और CNG पर मिल सकती है राहत
तेल की कीमतों में आई नरमी का असर आने वाले समय में भारत के ईंधन बाजार पर भी पड़ सकता है। कच्चा तेल सस्ता होने से पेट्रोल और डीजल के उत्पादन की लागत घटेगी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
हाल के महीनों में विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। वहीं सीएनजी की कीमतों में 6 रुपये प्रति किलोग्राम तक इजाफा हुआ था। एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। ऐसे में तेल बाजार में आई नरमी उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर बन सकती है।
महंगाई और माल ढुलाई लागत पर भी पड़ेगा असर
तेल की कीमतें कम होने का फायदा केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन लागत घटने से माल ढुलाई सस्ती हो सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनी रहती है तो महंगाई के दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है। इससे सरकार और तेल कंपनियों पर वित्तीय बोझ कम होगा और अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त सहारा मिल सकता है।
तेल कंपनियों के नुकसान में भी आ सकती है कमी
जानकारों का कहना है कि खुदरा कीमतों और लागत के बीच अंतर की वजह से सरकारी तेल कंपनियों पर भारी दबाव बना हुआ है। मौजूदा स्थिति में कंपनियों को प्रतिदिन सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति सामान्य होती है तो तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति में भी सुधार आने की उम्मीद है।
Navyug Samachar