
हेल्थ डेस्क: ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में डर बैठ जाता है। आम धारणा है कि यदि किसी व्यक्ति के दिमाग में ट्यूमर पाया गया है तो उसका एकमात्र इलाज सर्जरी ही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सही नहीं है। हर ब्रेन ट्यूमर का इलाज ऑपरेशन से ही हो, ऐसा जरूरी नहीं होता।
विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने इस बीमारी से जुड़े कई मिथकों और तथ्यों पर प्रकाश डाला है। उनका कहना है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में अब उपचार के कई विकल्प मौजूद हैं, जिनका चयन मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है।
क्या हर ब्रेन ट्यूमर में ऑपरेशन जरूरी होता है?
न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेन ट्यूमर का इलाज उसके प्रकार, आकार, स्थान, मरीज की उम्र और लक्षणों की गंभीरता को ध्यान में रखकर तय किया जाता है। कई मामलों में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती और केवल नियमित निगरानी से भी मरीज स्वस्थ जीवन जी सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि कुछ छोटे और धीरे-धीरे बढ़ने वाले ट्यूमर वर्षों तक स्थिर बने रहते हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर समय-समय पर एमआरआई जांच कर ट्यूमर की स्थिति पर नजर रखते हैं और तत्काल ऑपरेशन की सलाह नहीं देते।
इन परिस्थितियों में बढ़ सकती है सर्जरी की जरूरत
अगर ट्यूमर लगातार बढ़ रहा हो या उसकी वजह से सिरदर्द, दौरे पड़ना, देखने में परेशानी, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या बोलने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई देने लगें, तो सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उपचार का उद्देश्य सिर्फ ट्यूमर को हटाना नहीं होता, बल्कि मरीज की न्यूरोलॉजिकल क्षमता और जीवन की गुणवत्ता को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
सर्जरी के अलावा भी हैं कई विकल्प
चिकित्सकों के अनुसार ब्रेन ट्यूमर के इलाज में रेडियोथेरेपी, स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी, कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और एक्टिव सर्विलांस जैसे विकल्प भी प्रभावी भूमिका निभाते हैं।
कई बार ट्यूमर ऐसे स्थान पर होता है जहां ऑपरेशन का जोखिम अधिक होता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर अन्य उपचार पद्धतियों को प्राथमिकता देते हैं।
नई तकनीकों ने बढ़ाई इलाज की सफलता
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में तकनीक के क्षेत्र में हुए विकास ने ब्रेन ट्यूमर के उपचार को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया है।
हाई-रिजॉल्यूशन एमआरआई, न्यूरो-नेविगेशन, फंक्शनल ब्रेन मैपिंग और अवेक क्रेनियोटोमी जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से जटिल सर्जरी भी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हो गई हैं। इससे मरीजों के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ी है।
हर सर्जरी का उद्देश्य ट्यूमर हटाना नहीं होता
विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ मामलों में ऑपरेशन केवल बायोप्सी के लिए किया जाता है। इसमें ट्यूमर का छोटा हिस्सा निकालकर उसकी जांच की जाती है, जिससे बीमारी की सही प्रकृति का पता चल सके और आगे का उपचार तय किया जा सके।
सोशल मीडिया की जानकारी पर न करें भरोसा
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उपलब्ध अधूरी या भ्रामक जानकारी के आधार पर कोई भी चिकित्सकीय निर्णय नहीं लेना चाहिए। ब्रेन ट्यूमर एक जटिल बीमारी है और हर मरीज की स्थिति अलग होती है।
इसलिए उपचार का फैसला न्यूरोसर्जन, न्यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट और रेडिएशन विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही किया जाना चाहिए।
समय पर जांच सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेन ट्यूमर का निदान जीवन का अंत नहीं है। आज कई मरीज बिना सर्जरी के भी लंबे समय तक सामान्य जीवन जी रहे हैं, जबकि जिन मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है, उनके लिए नई तकनीकों ने सफलता की संभावनाएं काफी बढ़ा दी हैं।
समय पर जांच, सही निदान और विशेषज्ञों की सलाह ही इस बीमारी से प्रभावी तरीके से निपटने का सबसे महत्वपूर्ण उपाय है।
Navyug Samachar