Friday , 14 August 2026

‘चलो संसद’ मार्च से पहले CJP का बड़ा दावा, सरकार ने बातचीत की पहल की? जंतर-मंतर से अभिजीत दिपके का ऐलान

नेशनल डेस्क: नीट पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने बड़ा दावा किया है। संगठन का कहना है कि आंदोलन के बढ़ते दबाव के बाद केंद्र सरकार ने पहली बार आधिकारिक स्तर पर उनसे संपर्क कर बातचीत की पहल की है। हालांकि, इस दावे की अब तक केंद्र सरकार या किसी भी केंद्रीय मंत्रालय की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

संसद मार्च से पहले CJP ने कहा कि छात्रों के आंदोलन ने सरकार पर दबाव बनाया है और इसी के चलते संवाद की शुरुआत हुई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि सरकार की ओर से किस मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी ने बातचीत का प्रस्ताव रखा है।

मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

CJP ने स्पष्ट किया है कि जब तक उसकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। संगठन लगातार नीट पेपर लीक के मुद्दे पर कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

सोनम वांगचुक ने रखीं अपनी शर्तें

सफदरजंग अस्पताल में भर्ती पर्यावरण और शिक्षा कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि सरकार या संसद सदस्य मॉनसून सत्र के दौरान पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे को सदन में उठाने का ठोस लिखित आश्वासन देते हैं, तो वह 20 जुलाई को अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों से उन्हें संसद मार्च में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलती है तो विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और सांसद अस्पताल पहुंचकर छात्रों के मुद्दों को उठाने का भरोसा दें। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में हुई इस गंभीर चूक की जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

अभिजीत दिपके बोले- यह देश का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों को संबोधित करते हुए CJP के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने इस आंदोलन को देश के इतिहास का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश की जाती रही, लेकिन जंतर-मंतर पर जुटे हजारों युवाओं ने यह धारणा बदल दी है।

उन्होंने कहा कि जब वह अमेरिका में थे, तब लोगों का मानना था कि यह गुस्सा केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहेगा, लेकिन अब देशभर से पहुंचे छात्रों ने राजधानी की सड़कों पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है। दिपके ने दावा किया कि छात्रों का यह आंदोलन अब संसद तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है।

दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति से किया इनकार

संभावित संसद मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा कि इस मार्च या रैली के लिए पुलिस से कोई अनुमति नहीं ली गई है और प्रशासन की ओर से भी इसकी मंजूरी नहीं दी गई है।

पुलिस के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है। इसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने और जुलूस निकालने पर प्रतिबंध लगाया गया है। जंतर-मंतर और संसद भवन के आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

 

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