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Delhi O-Zone Bulldozer Action: कहीं आपका घर भी तो नहीं खतरे में? जानिए दिल्ली के किस जोन में आता है आपका इलाका

नेशनल डेस्क : दिल्ली में यमुना के डूब क्षेत्र यानी ओ-जोन में चल रही बुलडोजर कार्रवाई के बाद राजधानी के लाखों लोगों के बीच चिंता और जिज्ञासा बढ़ गई है। हालिया प्रशासनिक कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर दिल्ली का कौन सा इलाका किस जोन में आता है और किसी संपत्ति को खरीदने से पहले उसकी जोनल स्थिति जानना कितना जरूरी है।

दिल्ली में घर या प्लॉट खरीदते समय अधिकांश लोग लोकेशन, कीमत और कनेक्टिविटी पर ध्यान देते हैं, लेकिन शहर की जोनल प्लानिंग को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में किसी भी तरह की कानूनी या विकास संबंधी समस्या से बचने के लिए जोन की जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है।

ओ-जोन में क्यों हो रही है कार्रवाई?

दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने यमुना के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान तेज किया है। इसी क्रम में मजनू का टीला, वजीराबाद, जगतपुर और मोनेस्ट्री मार्केट समेत कई इलाकों में कार्रवाई की गई है।

इन घटनाओं के बाद बड़ी संख्या में लोग यह जानना चाह रहे हैं कि उनका इलाका किस जोन में आता है और कहीं उनकी संपत्ति भी किसी संवेदनशील क्षेत्र का हिस्सा तो नहीं है।

दिल्ली को 15 प्लानिंग जोनों में बांटा गया है

दिल्ली के नियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान के तहत राजधानी को कुल 15 प्लानिंग जोनों में विभाजित किया गया है। इन जोनों को ए से पी तक नाम दिया गया है, जबकि आई अक्षर का उपयोग नहीं किया गया है।

हर जोन की अपनी अलग भौगोलिक और विकास संबंधी विशेषताएं हैं, जिनके आधार पर निर्माण और भूमि उपयोग के नियम तय किए जाते हैं।

पुरानी दिल्ली से लेकर वीवीआईपी इलाकों तक का जोनल विभाजन

जोन ए में पुरानी दिल्ली और चारदीवारी के भीतर आने वाले इलाके शामिल हैं। वहीं जोन बी में करोल बाग, पटेल नगर, आनंद पर्वत और सराय रोहिल्ला जैसे क्षेत्र आते हैं।

जोन सी के अंतर्गत आजादपुर, सिविल लाइंस, कमला नगर, मॉडल टाउन, अशोक विहार और विश्वविद्यालय क्षेत्र शामिल हैं। राजधानी का वीवीआईपी और प्रशासनिक केंद्र जोन डी में रखा गया है, जिसमें लुटियंस दिल्ली, कनॉट प्लेस, चाणक्यपुरी, खान मार्केट और लोधी रोड जैसे इलाके आते हैं।

पूर्वी, दक्षिणी और पश्चिमी दिल्ली के प्रमुख क्षेत्र

पूर्वी दिल्ली का अधिकांश हिस्सा जोन ई के अंतर्गत आता है। इसमें शाहदरा, मयूर विहार, लक्ष्मी नगर, प्रीत विहार और आनंद विहार जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र शामिल हैं।

दक्षिण दिल्ली के विकसित इलाकों को जोन एफ में रखा गया है, जहां साकेत, वसंत कुंज, ग्रेटर कैलाश, ग्रीन पार्क, हौज खास और नेहरू प्लेस स्थित हैं।

पश्चिमी दिल्ली का बड़ा हिस्सा जोन जी में आता है, जिसमें राजौरी गार्डन, पंजाबी बाग, जनकपुरी, विकासपुरी और उत्तम नगर जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं।

बाहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का अलग वर्गीकरण

रोहिणी, पीतमपुरा और शालीमार बाग जैसे क्षेत्र जोन एच में शामिल हैं। वहीं महरौली, छतरपुर, सैनिक फार्म और घिटोरनी जैसे इलाके जोन जे का हिस्सा हैं।

द्वारका, नजफगढ़, पालम और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का क्षेत्र जोन के में रखा गया है। इसके अलावा बाहरी ग्रामीण क्षेत्रों को जोन एल, एम और एन में विभाजित किया गया है।

सबसे ज्यादा चर्चा में क्यों है ओ-जोन?

दिल्ली का ओ-जोन पूरी तरह यमुना नदी के डूब क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इसी जोन में मजनू का टीला, जगतपुर और मदनपुर खादर का कछार क्षेत्र आता है।

हाल के दिनों में इन्हीं इलाकों में अवैध निर्माणों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की गई है। यही वजह है कि ओ-जोन राजधानी का सबसे चर्चित जोन बन गया है।

नरेला और उत्तरी दिल्ली का क्षेत्र पी-जोन में

दिल्ली का अंतिम प्लानिंग क्षेत्र पी-जोन है, जिसे दो भागों में विभाजित किया गया है। इसके अंतर्गत नरेला सब-सिटी, अलीपुर, बुराड़ी और उत्तरी दिल्ली के कई अन्य इलाके शामिल हैं।

घर खरीदने से पहले जरूर करें यह जांच

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संपत्ति में निवेश करने से पहले यह पता करना जरूरी है कि वह किस प्लानिंग जोन में स्थित है और उस क्षेत्र में भूमि उपयोग की क्या स्थिति है। इससे भविष्य में कानूनी विवादों और प्रशासनिक कार्रवाई की आशंका काफी हद तक कम हो सकती है।

 

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