
लाइफस्टाइल डेस्क: अगर सुबह नींद से उठने के बाद जोड़ों में जकड़न महसूस होती है या दिनभर लगातार दर्द बना रहता है, तो इसे सामान्य थकान या विटामिन की कमी समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। यह लक्षण रुमेटाइड अर्थराइटिस का संकेत हो सकते हैं, जो एक ऑटोइम्यून बीमारी है और समय के साथ गंभीर रूप ले सकती है।
कम उम्र में भी बढ़ रही जोड़ों की समस्या
पहले जहां घुटनों और कूल्हों का दर्द बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, वहीं अब यह परेशानी कम उम्र के लोगों में भी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, खासकर महिलाएं इस बीमारी से अधिक प्रभावित होती हैं। लंबे समय तक बैठे रहने वाली दिनचर्या और शारीरिक सक्रियता की कमी इस समस्या को और बढ़ा रही है।
क्या है ऑटोइम्यून विकार?
ऑटोइम्यून विकार वह स्थिति है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपनी ही कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इससे शरीर में सूजन बढ़ती है और धीरे-धीरे जोड़ों को नुकसान पहुंचता है। विशेषज्ञों के अनुसार, रुमेटाइड अर्थराइटिस में आनुवंशिक कारणों के साथ-साथ खराब जीवनशैली, धूम्रपान और संक्रमण भी अहम भूमिका निभाते हैं।
जीवनशैली में बदलाव से मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित शारीरिक गतिविधि, योग और सही खानपान से इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लंबे समय तक बैठने से बचना और घुटनों व जोड़ों को सक्रिय रखना बेहद जरूरी है। हल्के व्यायाम और योग अभ्यास से जोड़ों में लचीलापन बढ़ता है और दर्द में राहत मिलती है।
किन चीजों से बढ़ सकती है सूजन?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आहार सूजन को बढ़ा सकते हैं, जिनसे बचने की सलाह दी जाती है। इनमें तले-भुने खाद्य पदार्थ, अधिक चीनी, रिफाइंड कार्ब्स, शराब और तंबाकू शामिल हैं। अधिक नमक और प्रिजर्वेटिव वाले खाद्य पदार्थ भी जोड़ों की समस्या को बढ़ा सकते हैं।
क्या खाना फायदेमंद है?
जोड़ों के दर्द में हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज जैसे रागी, जौ और ज्वार, तथा दालों का संतुलित सेवन फायदेमंद माना जाता है। मटर और बीन्स जैसे खाद्य पदार्थ एंटीऑक्सीडेंट्स और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं।
थेरेपी और व्यायाम का महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, फिजियोथेरेपी और नियमित हल्की एक्सरसाइज से जोड़ों की सक्रियता बढ़ती है। इससे बीमारी की गति धीमी हो सकती है और दैनिक जीवन में सुधार आता है। योग और प्राणायाम भी तनाव कम करने और शरीर को सक्रिय रखने में मददगार हैं।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
अगर जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन, जकड़न या लालपन बना रहता है और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर निदान से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि रुमेटाइड अर्थराइटिस केवल शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। तनाव और चिंता इसकी स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं। ऐसे में दवाओं के साथ जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी है।
Navyug Samachar