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परमा एकादशी की शाम करें ये 4 खास उपाय! इन जगहों पर जलाएं दीपक, दूर हो सकती हैं आर्थिक और पारिवारिक परेशानियां

धर्म डेस्क : परमा एकादशी का दिन सनातन धर्म में बेहद शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस विशेष तिथि की संध्या बेला में दीपदान करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कई प्रकार के दोषों के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। कहा जाता है कि इस दिन कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाने से सुख, समृद्धि और शांति का वास बना रहता है।

ईशान कोण में दीपक जलाना माना जाता है शुभ

परमा एकादशी की शाम घर के पूजा स्थल या ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में दीपक जलाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि तथा धन-धान्य की वृद्धि होती है।

पीपल के पेड़ के नीचे करें दीपदान

शास्त्रों में पीपल के वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि इसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश के साथ शनि देव का भी वास होता है। परमा एकादशी की शाम पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से जीवन की बाधाएं और संकट दूर हो सकते हैं।

मुख्य द्वार पर जलाएं दीपक

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर के मुख्य द्वार के बाहर चौखट के दाईं ओर दीपक जलाना शुभ फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती और सकारात्मक वातावरण बना रहता है। दीपक का मुख दक्षिण दिशा की ओर रखने की सलाह दी जाती है।

विष्णु मंदिर में दीपदान का विशेष महत्व

यदि संभव हो तो परमा एकादशी की शाम किसी विष्णु मंदिर में जाकर भगवान विष्णु के चरणों में दीपदान करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे आध्यात्मिक उन्नति और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

दीपक जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जलते हुए दीपक को सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। दीपक रखने से पहले उसके नीचे चावल, काले तिल या फूलों की पंखुड़ियां रखना शुभ माना जाता है।

परमा एकादशी के दिन घी या तिल के तेल का दीपक जलाने की सलाह दी जाती है। वहीं बत्ती के लिए सूती धागे या मौली का उपयोग करना श्रेष्ठ माना गया है।

यदि मुख्य द्वार पर पितरों की शांति के लिए दीपक जला रहे हैं तो उसमें थोड़ी मात्रा में काली उड़द डालने की भी परंपरा बताई गई है।

डिस्क्लेमर : यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।

 

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