Sunday , 4 October 2026

रोज खा रहे हैं पैकेट वाले स्नैक्स और इंस्टेंट फूड? नई स्टडी में हार्ट डिजीज से लेकर कैंसर-डायबिटीज तक के बढ़ते जोखिम का कनेक्शन सामने आया

पैकेट वाले स्नैक्स, मीठे ड्रिंक और रेडी-टू-ईट फूड आज रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। समय बचाने और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की वजह से इनका इस्तेमाल बढ़ा है। लेकिन इन खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन सेहत के लिए चिंता बढ़ा सकता है। Family Medicine and Community Health जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड यानी UPF और कई गंभीर बीमारियों के बीच संबंध पाया गया है।

शोधकर्ताओं ने अमेरिका, यूरोप, एशिया और ओशिनिया के 88 लाख 19 हजार 894 वयस्कों को शामिल करने वाली 51 स्टडीज के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इन शोधों में लोगों पर 2 से 32 साल तक नजर रखी गई थी। रिसर्च में हार्ट डिजीज, कैंसर, मोटापा, डायबिटीज, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और समय से पहले मौत जैसे स्वास्थ्य जोखिमों का अध्ययन किया गया।

रोज 100 ग्राम ज्यादा UPF खाने पर हार्ट रिस्क 14% ज्यादा

स्टडी का सबसे अहम निष्कर्ष दिल की सेहत को लेकर सामने आया। रिसर्च के मुताबिक, रोजाना अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की मात्रा में 100 ग्राम की बढ़ोतरी के साथ कार्डियोवस्कुलर इवेंट का जोखिम करीब 14% ज्यादा पाया गया। इसमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हृदय रोग से होने वाली मौत जैसी घटनाएं शामिल थीं।

हालांकि, इस आंकड़े का यह मतलब नहीं है कि 100 ग्राम पैकेट वाला खाना खाने से किसी व्यक्ति को सीधे हार्ट अटैक हो जाएगा। यह रिसर्च पहले से मौजूद ऑब्जर्वेशनल स्टडीज के आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है। इसलिए इससे सीधा कारण और परिणाम साबित नहीं होता, बल्कि UPF के सेवन और स्वास्थ्य जोखिमों के बीच संबंध सामने आता है।

सिर्फ दिल नहीं, इन बीमारियों से भी जुड़ा जोखिम

स्टडी के विश्लेषण में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के ज्यादा सेवन और कई अन्य स्वास्थ्य जोखिमों के बीच भी संबंध पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक कैंसर का जोखिम 4% ज्यादा, किसी भी कारण से मौत का जोखिम 3% ज्यादा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम या डायबिटीज का जोखिम 2% ज्यादा पाया गया।

कौन-से खाद्य पदार्थ Ultra-Processed Food हैं?

हर पैकेट में मिलने वाला या प्रोसेस किया हुआ खाद्य पदार्थ UPF नहीं होता। खाद्य पदार्थों को प्रोसेस करने की अलग-अलग श्रेणियां होती हैं। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के आम उदाहरणों में पैकेट वाले चिप्स, कुकीज, कन्फेक्शनरी, मीठे सॉफ्ट ड्रिंक, इंस्टेंट नूडल्स, कई तरह के रेडी-टू-ईट फूड, कुछ प्रोसेस्ड मीट और बाजार में तैयार होने वाले पैकेज्ड बेकरी प्रोडक्ट शामिल हैं।

वहीं दूध का पाश्चराइजेशन, फ्रोजन सब्जियां, डिब्बाबंद बीन्स या साबुत अनाज से बनी ब्रेड जैसी चीजें प्रोसेस्ड हो सकती हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की श्रेणी में ही आएं।

दिल की सेहत पर क्यों पड़ सकता है असर?

कई अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में नमक, अतिरिक्त चीनी और सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होती है, जबकि फाइबर और जरूरी पोषक तत्व अपेक्षाकृत कम हो सकते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों को बार-बार खाने पर जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेना आसान हो सकता है।

लंबे समय में इससे मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, खराब कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। ये सभी कारक आगे चलकर हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।

 

Check Also

देश में तेजी से बढ़ रही डायबिटीज और मानसिक तनाव की समस्या, हर 10 में करीब 4 लोगों में सामने आई चिंता

नई दिल्ली: देश में डायबिटीज और मानसिक तनाव जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर हालिया हेल्थ …