Thursday , 10 September 2026

‘मुझे सिर्फ ग्लैमर तक सीमित कर दिया गया’… जीनत अमान का छलका दर्द, सालों बाद खोले फिल्म इंडस्ट्री के अनसुने राज

मनोरंजन डेस्क : हिंदी सिनेमा की प्रतिष्ठित अभिनेत्री जीनत अमान ने अपने फिल्मी करियर और उस दौर में अभिनेत्रियों को लेकर बनी धारणा पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक लोगों ने उन्हें केवल एक ग्लैमरस स्टार के रूप में देखा, जबकि उनकी सोच, व्यक्तित्व और रचनात्मक पक्ष को वह पहचान नहीं मिल सकी जिसकी वह हकदार थीं।

जीनत अमान के मुताबिक, पर्दे पर निभाए गए किरदारों ने उनकी ऐसी छवि बना दी थी कि लोग उन्हें वास्तविक जीवन में भी उसी नजरिए से देखने लगे। उन्होंने कहा कि जब लोग उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलते थे तो अक्सर यह देखकर हैरान रह जाते थे कि उनका स्वभाव और सोच फिल्मों में दिखाई गई छवि से काफी अलग है।

‘अभिनय से ज्यादा मेरी छवि पर हुई चर्चा’

अभिनेत्री ने कहा कि उनके करियर के दौरान उनकी अभिनय क्षमता और विचारों से अधिक उनके ग्लैमरस व्यक्तित्व को महत्व दिया गया। उनका मानना है कि एक कलाकार की पहचान उसके काम और प्रतिभा से होनी चाहिए, लेकिन उस दौर में अक्सर अभिनेत्रियों को उनकी बाहरी छवि के आधार पर आंका जाता था।

उन्होंने बताया कि कई बार उनके व्यक्तित्व के अन्य पहलुओं को नजरअंदाज कर केवल उनकी स्क्रीन इमेज को ही प्रमुखता दी गई।

फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की भूमिका थी सीमित

जीनत अमान ने कहा कि उस समय फिल्म निर्माण की प्रक्रिया काफी हद तक पुरुष प्रधान थी। फिल्मों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले मुख्य रूप से पुरुषों द्वारा लिए जाते थे और अभिनेत्रियों की रचनात्मक राय को सीमित महत्व मिलता था।

उन्होंने बताया कि उनसे अपेक्षा की जाती थी कि वे गीतों, नृत्य और आकर्षक दृश्यों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन करें, जबकि कहानी, किरदारों की गहराई और प्रस्तुति जैसे विषयों पर उनकी भागीदारी कम रहती थी।

‘बोल्ड और आकर्षक लुक पर दिया जाता था ज्यादा जोर’

जीनत अमान ने यह भी साझा किया कि कई मौकों पर उनसे अधिक आकर्षक और बोल्ड परिधान पहनने की अपेक्षा की जाती थी। हालांकि उनकी निजी पसंद अपेक्षाकृत सादगीपूर्ण और संतुलित थी, लेकिन व्यावसायिक जरूरतों के चलते उनके लुक को अधिक ग्लैमरस बनाने पर जोर दिया जाता था।

उनका कहना है कि उस समय अक्सर किसी अभिनेत्री की प्रतिभा से अधिक उसकी बाहरी प्रस्तुति को महत्व दिया जाता था।

आज के दौर में दिख रहे हैं सकारात्मक बदलाव

अभिनेत्री ने माना कि हिंदी फिल्म उद्योग में समय के साथ काफी बदलाव आए हैं। आज महिला कलाकारों को पहले की तुलना में अधिक सशक्त किरदार मिल रहे हैं और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में भी बेहतर भागीदारी प्राप्त हो रही है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मनोरंजन जगत में महिलाओं को केवल उनकी बाहरी छवि के आधार पर आंकने की प्रवृत्ति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और इस सोच में अभी और बदलाव की जरूरत है।

‘कलाकार की असली पहचान उसके काम से बनती है’

जीनत अमान का मानना है कि किसी भी कलाकार का मूल्यांकन उसकी अभिनय क्षमता, अनुभव और रचनात्मक योगदान के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्लैमर किसी कलाकार के पेशे का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन उसकी पूरी पहचान नहीं।

अपने दौर की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल रहीं जीनत अमान ने कई यादगार फिल्मों में काम कर हिंदी सिनेमा में अलग मुकाम हासिल किया। आधुनिक सोच, आत्मविश्वास और अलग तरह के किरदारों के जरिए उन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई और आज भी उनके विचार नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा माने जाते हैं।

 

Check Also

‘अब भारत में नहीं रहती’, ‘रेबेल किड’ अपूर्वा मखीजा ने छोड़ा देश, न्यूयॉर्क जाने की बताई बड़ी वजह

मनोरंजन डेस्क: सोशल मीडिया पर ‘रेबेल किड’ के नाम से मशहूर कंटेंट क्रिएटर अपूर्वा मखीजा …