खेल डेस्क: स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन हो गया है। 11 दिनों तक चले इस बहु-खेल आयोजन में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 39 पदक अपने नाम किए। भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। इस बार भारतीय दल ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक जीते।
हालांकि, इस बार कुश्ती, बैडमिंटन, शूटिंग, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे भारत के मजबूत खेलों को प्रतियोगिता में जगह नहीं मिली थी। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने बॉक्सिंग, भारोत्तोलन, जूडो, एथलेटिक्स और पैरा खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन कर अपनी क्षमता साबित की।
39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा भारत
23 जुलाई से 2 अगस्त तक चले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने कुल 39 पदक हासिल किए। इस बार 38 भारतीय खिलाड़ियों ने पदक जीते, जबकि एथलीट गुलवीर सिंह ने दो अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीतकर खास उपलब्धि हासिल की।
पदकों की संख्या 2010 दिल्ली और 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स की तुलना में कम रही, लेकिन जिन खेलों में भारत का दबदबा रहता है, उनके शामिल नहीं होने के बावजूद यह प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली माना जा रहा है।
बॉक्सिंग में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बॉक्सिंग भारत के लिए सबसे सफल खेल साबित हुआ। भारतीय मुक्केबाजों ने कुल 10 पदक जीते, जिसमें 7 स्वर्ण पदक शामिल रहे। यह किसी एक कॉमनवेल्थ गेम्स में बॉक्सिंग में भारत का सबसे शानदार प्रदर्शन माना जा रहा है।
स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय मुक्केबाजों में प्रीति पवार, जैस्मिन लंबोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घंघास, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच और अंकुश पांघाल शामिल रहे। वहीं जादुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक जीते।
मीराबाई चानू ने लगातार तीसरी बार रचा इतिहास
भारोत्तोलन में भारत की स्टार खिलाड़ी मीराबाई चानू ने महिला 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
मीराबाई इस उपलब्धि के साथ लगातार तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण जीतने वाली चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हो गईं। भारोत्तोलन में ऋषिकांत सिंह, मुथुपंडी राजा, ज्ञानेश्वरी यादव, वल्लूरी अजय बाबू, हरजिंदर कौर और लवप्रीत सिंह ने रजत पदक जीते, जबकि बिंद्यारानी देवी ने कांस्य पदक अपने नाम किया।
जूडो में भारत ने बनाया नया रिकॉर्ड
जूडो में भी भारत के लिए यह संस्करण यादगार रहा। असमीता डे ने महिला 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो की पहली भारतीय महिला चैंपियन बनने का इतिहास रचा।
इसके बाद हर्ष सिंह ने पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। यामिनी मौर्य ने रजत और उन्नति शर्मा ने कांस्य पदक जीतकर भारत के खाते में महत्वपूर्ण पदक जोड़े।
एथलेटिक्स में खिलाड़ियों ने दिखाया दम
भारतीय एथलेटिक्स दल ने भी शानदार प्रदर्शन किया। गुलवीर सिंह ने पुरुष 10,000 मीटर में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीतकर एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में दो व्यक्तिगत पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एवं फील्ड एथलीट बनने की उपलब्धि हासिल की।
तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में कांस्य पदक जीतकर भारत को इस स्पर्धा का पहला कॉमनवेल्थ पदक दिलाया। नीरज चोपड़ा ने पुरुष भाला फेंक में रजत पदक जीता। वहीं मुरली श्रीशंकर, प्रवीन चित्रवेल और सर्वेश कुशारे ने भी रजत पदक हासिल किए। सेल्वा प्रभु, सीमा कालीरामना और यश वीर सिंह ने कांस्य पदक जीते।
पैरा खिलाड़ियों ने भी बढ़ाया देश का गौरव
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी शानदार रहा। पैरा एथलेटिक्स और पैरा पावरलिफ्टिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने कई पदक जीते।
दिलीप गावित और सोमन राणा ने स्वर्ण पदक हासिल किए। मोहम्मद बासिल और शुभम जुयाल ने रजत पदक जीते, जबकि शिल्पा के. शैला और झंडू कुमार ने कांस्य पदक अपने नाम किए। शर्मिला धनखड़ ने भी पैरा एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीता।
इन खेलों में भारत ने जीते पदक
बॉक्सिंग में भारत को 10 पदक मिले।
भारोत्तोलन में 8 पदक मिले।
एथलेटिक्स में 10 पदक मिले।
जूडो में 4 पदक मिले।
पैरा एथलेटिक्स में 6 पदक मिले।
पैरा पावरलिफ्टिंग में 1 पदक मिला।
भारत के स्वर्ण पदक विजेता
मीराबाई चानू, शर्मिला धनखड़, दिलीप गावित, असमीता डे, हर्ष सिंह, प्रीति पवार, जैस्मिन लंबोरिया, सोमन राणा, साक्षी चौधरी, प्रिया घंघास, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच और अंकुश पांघाल।
भारत के रजत पदक विजेता
ऋषिकांत सिंह, मुथुपंडी राजा, ज्ञानेश्वरी यादव, सर्वेश कुशारे, वल्लूरी अजय बाबू, हरजिंदर कौर, गुलवीर सिंह, मुरली श्रीशंकर, मोहम्मद बासिल, लवप्रीत सिंह, यामिनी मौर्य, नीरज चोपड़ा, प्रवीन चित्रवेल, जादुमणि सिंह, शुभम जुयाल, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल।
भारत के कांस्य पदक विजेता
झंडू कुमार, बिंद्यारानी देवी, शिल्पा के. शैला, सीमा कालीरामना, तेजस्विन शंकर, यश वीर सिंह, सेल्वा प्रभु, उन्नति शर्मा और गुलवीर सिंह।
क्यों खास रहा भारत का प्रदर्शन
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि मजबूत माने जाने वाले कई खेलों की गैरमौजूदगी के बावजूद खिलाड़ियों ने नए क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत दिखाई।
बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, जूडो और पैरा खेलों में मिला प्रदर्शन भारतीय खेलों में बदलाव की तस्वीर पेश करता है। ग्लास्गो में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता ने आने वाले एशियाई खेलों और ओलंपिक अभियानों के लिए भी नई उम्मीदें जगाई हैं।
Navyug Samachar
