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भारत के डिजिटल मॉडल पर फिदा हुआ इंडोनेशिया, मोदी की जकार्ता यात्रा में हो सकता है ऐतिहासिक समझौता

नेशनल डेस्क : हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती डिजिटल ताकत अब वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रही है। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी आबादी वाले देश इंडोनेशिया ने अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के लिए भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) मॉडल को अपनाने में गहरी रुचि दिखाई है। ऐसे में जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित जकार्ता यात्रा दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ सकती है।

जानकारों के अनुसार यह दौरा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच डिजिटल सहयोग को नई ऊंचाई देने वाला महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।

भारत को चुना डिजिटल साझेदार

करीब 28 करोड़ आबादी और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले इंडोनेशिया को दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र माना जाता है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक केवल ई-कॉमर्स क्षेत्र में ही उसकी डिजिटल अर्थव्यवस्था 194.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।

ऐसे समय में इंडोनेशिया ने डिजिटल विकास के लिए चीन और पश्चिमी मॉडल के बजाय भारत को अपना प्रमुख डिजिटल साझेदार चुना है। इसे भारत की डिजिटल कूटनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

भारत के ONDC से प्रेरित है इंडोनेशिया का नया नेटवर्क

दोनों देशों के बीच डिजिटल सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क (ION) है। यह भारत के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) की अवधारणा से प्रेरित है और आधुनिक डिजिटल प्रोटोकॉल पर आधारित है।

बताया जा रहा है कि 7 जुलाई को प्रस्तावित मोदी-प्रबोवो शिखर वार्ता के दौरान ION के पहले लाइव ट्रांजैक्शन का प्रदर्शन किया जा सकता है।

यह नेटवर्क खरीदारों, विक्रेताओं, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं और भुगतान प्रणालियों को एक साझा डिजिटल मंच पर जोड़ने का काम करेगा।

छोटे कारोबारियों को मिलेगा बड़ा फायदा

इंडोनेशिया में वर्तमान समय में करीब 6.5 करोड़ सूक्ष्म और लघु उद्यम सक्रिय हैं। इन कारोबारियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 25 से 40 प्रतिशत तक कमीशन देना पड़ता है।

ION के लागू होने के बाद इस लागत को घटाकर 8 प्रतिशत से कम करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने के साथ डिजिटल बाजार में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।

UPI और QRIS का एकीकरण बनेगा गेमचेंजर

भारत और इंडोनेशिया के बीच डिजिटल भुगतान प्रणाली को जोड़ने की दिशा में भी तेजी से काम चल रहा है। भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और इंडोनेशिया की QRIS भुगतान प्रणाली के एकीकरण को इस साझेदारी का दूसरा महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है।

2025 के अंत तक QRIS से 5.9 करोड़ उपयोगकर्ता और 4.2 करोड़ व्यापारी जुड़ चुके थे। ऐसे में दोनों देशों के बीच भुगतान प्रणाली का सीधा संपर्क व्यापार और पर्यटन को नई गति दे सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हर साल बाली और अन्य इंडोनेशियाई पर्यटन स्थलों का दौरा करने वाले लगभग 17 लाख भारतीय पर्यटकों को भी बड़ी सुविधा मिलेगी।

डिजिटल पहचान और कर व्यवस्था में भी सहयोग

भारत की तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग इंडोनेशिया डिजिटल पहचान, ई-केवाईसी और कर प्रशासन के आधुनिकीकरण जैसे क्षेत्रों में भी करना चाहता है। इसके अलावा पूंजी बाजार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी तंत्र विकसित करने पर भी चर्चा चल रही है।

इन पहलों का उद्देश्य इंडोनेशिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और आत्मनिर्भर डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाना है।

मोदी यात्रा पर टिकी नजरें

अब सबकी निगाहें जुलाई में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जकार्ता यात्रा पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान डिजिटल अवसंरचना, भुगतान प्रणाली, ई-कॉमर्स नेटवर्क और तकनीकी सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौते सामने आ सकते हैं, जो भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई दिशा देंगे।

 

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