Friday , 23 October 2026

₹175 का दूध रिफंड लेना पड़ा महंगा! फर्जी कस्टमर केयर के जाल में फंसी महिला, खाते से उड़ गए ₹1.91 लाख

नेशनल डेस्क: गुजरात के राजकोट में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 175 रुपये का रिफंड लेने की कोशिश एक 63 वर्षीय महिला को भारी पड़ गई। साइबर ठगों ने खुद को कंपनी का कस्टमर केयर कर्मचारी बताकर महिला के मोबाइल में फर्जी एपीके फाइल इंस्टॉल करवाई और उनके दो बैंक खातों से कुल 1.91 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर ली। शिकायत के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

खराब दूध का रिफंड मांगना बना ठगी की वजह

पुलिस के अनुसार, जामनगर रोड स्थित एक सोसाइटी में रहने वाली सेवानिवृत्त महिला ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से दूध के पांच पैकेट मंगवाए थे। पैकेट खोलने पर दूध खराब निकला, जिसके बाद उन्होंने 175 रुपये का रिफंड लेने के लिए गूगल पर कंपनी का कस्टमर केयर नंबर खोजा।

सर्च के दौरान मिले एक मोबाइल नंबर पर महिला ने संपर्क किया। फोन रिसीव करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम इस्माइल अंसारी बताते हुए खुद को कंपनी का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताया और रिफंड दिलाने का भरोसा दिलाया।

व्हाट्सएप पर भेजी फर्जी एपीके फाइल, फिर खाली कर दिए खाते

आरोपी ने रिफंड प्रक्रिया पूरी करने के बहाने महिला को व्हाट्सएप पर जोड़ा और उनके मोबाइल पर एक एपीके फाइल भेजी। महिला ने निर्देशों का पालन करते हुए उसे इंस्टॉल कर लिया। इसके बाद ठगों ने अलग-अलग ऑनलाइन लेनदेन के जरिए बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते से 97,072 रुपये और आईसीआईसीआई बैंक के खाते से 94,262 रुपये निकाल लिए। इस तरह कुल 1,91,334 रुपये विभिन्न यूपीआई आईडी और बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।

मैसेज आने पर हुआ ठगी का पता

बैंक खाते से लगातार रकम कटने के संदेश मिलने के बाद महिला को धोखाधड़ी का एहसास हुआ। उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मामले की सूचना साइबर क्राइम पुलिस को दी गई।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी

राजकोट शहर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने इस मामले में विभिन्न मोबाइल नंबरों और बैंक खाताधारकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यूपीआई आईडी, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

साइबर पुलिस ने लोगों को दी अहम सलाह

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी कंपनी, बैंक या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का कस्टमर केयर नंबर केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट से ही प्राप्त करें। गूगल पर दिखाई देने वाले नंबरों पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें।

इसके अलावा किसी अनजान व्यक्ति की ओर से भेजी गई एपीके फाइल या अन्य एप्लिकेशन को डाउनलोड और इंस्टॉल करने से बचें। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी रिफंड के लिए यूपीआई पिन दर्ज करने या पैसे भेजने की आवश्यकता नहीं होती। यदि कोई रिफंड के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने या पिन साझा करने को कहता है, तो यह साइबर ठगी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।

 

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