
नेशनल डेस्क: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान हुए विवाद और हिंसा को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के लिए भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, जबकि बवाल बाहरी लोगों ने किया। इस बयान के बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
सोनम वांगचुक को हटाए जाने के बाद बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 18 से 19 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। बाद में पुलिस ने उन्हें वहां से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। इस कार्रवाई के बाद सीजेपी और उसके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया। सोमवार, मंगलवार और बुधवार को जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में लगातार प्रदर्शन हुए।
अभिजीत दीपके ने लगाए गंभीर आरोप
मीडिया से बातचीत में अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से बाहरी लोगों को भेजा गया, जिन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक बनाने की कोशिश की। उनका दावा था कि पुलिस पर हुए पथराव में भी उन्हीं लोगों की भूमिका थी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पिछले एक महीने से जंतर-मंतर पर पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रही है।
आंदोलन को अहिंसक रखने की कही बात
अभिजीत दीपके ने कहा कि उनका आंदोलन आगे भी पूरी तरह शांति और अहिंसा के रास्ते पर ही जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सीजेपी के कार्यकर्ता किसी भी तरह की हिंसा या बवाल में शामिल नहीं होंगे और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाते रहेंगे।
हिंसा में चार पुलिसकर्मी हुए घायल
बुधवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान स्थिति हिंसक हो गई। इस दौरान पुलिस पर पथराव हुआ, जिसमें दिल्ली पुलिस के दो एसीपी समेत चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। घटना के बाद पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
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