
मनोरंजन डेस्क : भारतीय सिनेमा के महान पार्श्वगायकों में शुमार मोहम्मद रफी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा आज भी लोगों को भावुक कर देता है। कहा जाता है कि अपनी जिंदगी के आखिरी दिन से ठीक पहले उन्होंने एक अधूरा गीत पूरा करने के लिए अचानक स्टूडियो लौटने का फैसला लिया था। बाद में यही गीत उनकी अंतिम रिकॉर्डिंग में गिना गया।
बताया जाता है कि यह घटना 30 जुलाई 1980 की है। उस समय फिल्म आस पास के गीतों की रिकॉर्डिंग चल रही थी। फिल्म में धर्मेंद्र और हेमा मालिनी मुख्य भूमिकाओं में थे, जबकि संगीत की जिम्मेदारी लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल की जोड़ी के पास थी।
स्टूडियो से निकल गए थे, फिर अचानक वापस लौटे
रिकॉर्डिंग के दौरान फिल्म के एक गीत का कुछ हिस्सा पूरा हो चुका था और बाकी रिकॉर्डिंग अगले दिन के लिए तय थी। काम समाप्त होने के बाद सभी लोग स्टूडियो से निकलने लगे। मोहम्मद रफी भी वहां से जा चुके थे और अपनी गाड़ी तक पहुंच गए थे।
लेकिन कुछ देर बाद वह अचानक वापस स्टूडियो लौट आए। उन्होंने इच्छा जताई कि अधूरा हिस्सा उसी दिन पूरा कर लिया जाए। इसके बाद उन्होंने गीत की बची हुई पंक्तियां रिकॉर्ड कीं और देर रात घर लौट गए।
‘तू कहीं आस पास है दोस्त’ बना आखिरी रिकॉर्ड किया गया गीत
बताया जाता है कि उस दिन जिस गीत को उन्होंने पूरा किया, वह फिल्म आस पास का भावुक गीत ‘तू कहीं आस पास है दोस्त’ था। बाद में यही गीत उनके जीवन की अंतिम रिकॉर्डिंग के रूप में याद किया जाने लगा।
गीत के बोल आज भी उनके प्रशंसकों को भावुक कर देते हैं—
तेरे आने की आस है दोस्त
शाम फिर क्यों उदास है दोस्त
महकी महकी फिजा ये कहती है
तू कहीं आस पास है दोस्त
अगले दिन हार्ट अटैक ने छीन ली सुरों की दुनिया की अमूल्य आवाज
31 जुलाई 1980 को मोहम्मद रफी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बताया जाता है कि उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। दिन के दौरान उन्होंने भजन की रिहर्सल भी की, लेकिन बाद में उन्हें हार्ट अटैक आया। अस्पताल ले जाने के प्रयास हुए, लेकिन उसी दिन सुरों की वह महान आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई।
मोहम्मद रफी ने अपने करियर में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी और कई दशकों तक हिंदी सिनेमा के संगीत पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।
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