
यूपी डेस्क : अयोध्या के राम मंदिर में प्राप्त दान, चढ़ावे और वित्तीय लेन-देन को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से मांगी गई जानकारी पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने फिलहाल कोई विवरण देने से इनकार कर दिया है। ट्रस्ट का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही है, इसलिए इस समय वित्तीय अभिलेख और संबंधित दस्तावेज साझा करना संभव नहीं है।
मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। दान और चढ़ावे के उपयोग को लेकर उठे सवालों ने पूरे घटनाक्रम को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
स्थानीय भाजपा नेता की शिकायत से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब अयोध्या के भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई शिकायत में मंदिर को मिले चंदे, वित्तीय लेन-देन और जमीन से जुड़े सौदों की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े किए।
शिकायत में मांग की गई कि ट्रस्ट अपनी स्थापना से लेकर अब तक की आय, संपत्ति और खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक करे, ताकि श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के सामने सभी तथ्य स्पष्ट हो सकें।
PMO को भेजे गए दो पत्रों ने बढ़ाई हलचल
जानकारी के अनुसार डॉ. रजनीश सिंह ने 9 जून को पहला पत्र भेजकर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का विस्तृत ब्योरा मांगा था। इसके बाद 12 जून को भेजे गए दूसरे पत्र में चढ़ावे और दान की राशि से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग दोहराई गई।
शिकायत के बाद शासन स्तर पर कार्रवाई करते हुए 13 जून को मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। इसके बाद से जांच एजेंसियां विभिन्न पहलुओं की पड़ताल में जुटी हुई हैं।
PMO के संज्ञान लेने के बाद प्रशासन हुआ सक्रिय
प्रधानमंत्री कार्यालय ने शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले को अयोध्या जिला प्रशासन को भेज दिया। इसके बाद प्रशासन ने ट्रस्ट से संपर्क कर आवश्यक जानकारियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
सूत्रों के मुताबिक, प्रशासनिक अधिकारियों ने ट्रस्ट से वित्तीय रिकॉर्ड, चंदे का विवरण और अन्य संबंधित दस्तावेज मांगे थे, ताकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच आगे बढ़ाई जा सके।
चंपत राय ने जांच का हवाला देकर रोकी जानकारी
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जब ट्रस्ट से विस्तृत जानकारी मांगी गई तो ट्रस्ट नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच एसआईटी के अधीन चल रही है। ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि जांच एजेंसी पहले से ही आवश्यक रिकॉर्ड और दस्तावेज एकत्र कर रही है, इसलिए समानांतर रूप से अन्य किसी एजेंसी को अलग से जानकारी उपलब्ध कराना उचित नहीं होगा।
इसी आधार पर फिलहाल मांगी गई वित्तीय जानकारी साझा नहीं की गई है।
किन मुद्दों पर मांगा गया था ब्योरा?
शिकायत में मंदिर से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी मांगी गई थी। इनमें समर्पण निधि अभियान के तहत प्राप्त धनराशि, देश-विदेश से मिले दान, भक्तों द्वारा अर्पित सोने-चांदी और अन्य बहुमूल्य आभूषणों का विवरण शामिल था।
इसके अलावा मंदिर से जुड़े बैंक खातों, भूमि खरीद-बिक्री, निर्माण कार्यों पर हुए खर्च, प्रशासनिक व्यय और ऑडिट रिपोर्ट की जानकारी भी मांगी गई थी। फिलहाल इन सभी बिंदुओं पर एसआईटी जांच जारी रहने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
जांच पर टिकी सबकी नजर
दान और चढ़ावे से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अब सभी की नजर एसआईटी की जांच पर है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में उठाए गए सवालों में कितना तथ्य है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
Navyug Samachar