Friday , 14 August 2026

शहरी महिलाओं में मोटापा बढ़ा, ग्रामीण इलाकों में 42% महिलाएं इंटरनेट से दूर, स्वास्थ्य और सामाजिक बदलाव के बड़े संकेत, NFHS-6 रिपोर्ट की रिपोर्ट में हैरान कर देने वाले खुलासे

नेशनल डेस्क: नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) के ताजा आंकड़ों ने देश में स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल पहुंच से जुड़े कई अहम बदलावों को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जहां एक तरफ शहरी क्षेत्रों में मोटापा और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ी हैं, वहीं ग्रामीण भारत में अभी भी डिजिटल पहुंच की बड़ी खाई बनी हुई है।

शहरी महिलाओं में मोटापे की बढ़ती समस्या
सर्वे के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की 30.7 फीसदी महिलाएं अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में हैं। इसमें शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 42.8 फीसदी तक पहुंच गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 25.5 फीसदी दर्ज किया गया है। पिछले सर्वे की तुलना में शहरी महिलाओं में मोटापे की दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो अब गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।

ब्लड शुगर के मामलों में भी बढ़ोतरी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हाई ब्लड शुगर के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है। 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाओं में यह दर 13.5 फीसदी से बढ़कर 17.8 फीसदी हो गई है। शहरी क्षेत्रों में यह समस्या ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक पाई गई है।

इंटरनेट उपयोग में तेजी, लेकिन ग्रामीण अंतर कायम
सर्वे के मुताबिक, महिलाओं में इंटरनेट उपयोग 52.9 फीसदी से बढ़कर 73.4 फीसदी तक पहुंच गया है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी 42 फीसदी महिलाएं इंटरनेट से दूर हैं। शहरी क्षेत्रों में इंटरनेट उपयोग 82.3 फीसदी तक पहुंच गया है, जो डिजिटल प्रगति को दर्शाता है।

बैंकिंग और मोबाइल उपयोग में सुधार
महिलाओं के वित्तीय और डिजिटल सशक्तिकरण में सुधार देखा गया है। अब 89 फीसदी महिलाएं अपने बैंक या बचत खाते का खुद उपयोग कर रही हैं, जो पहले 78.6 फीसदी था। वहीं मोबाइल फोन का खुद उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़कर 63.6 फीसदी हो गई है।

शिक्षा स्तर में सुधार, लेकिन लैंगिक अंतर कायम
सर्वे के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की 50.4 फीसदी महिलाएं 10 साल से अधिक समय तक स्कूल गई हैं, जो पहले के सर्वे की तुलना में सुधार दर्शाता है। हालांकि पुरुषों की यह दर 61.4 फीसदी है, जिससे शिक्षा में लैंगिक अंतर अब भी बना हुआ है।

बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के संकेत
रिपोर्ट में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की सेहत में सुधार दर्ज किया गया है। डायरिया के मामलों में कमी आई है और यह दर 0.7 फीसदी से घटकर 0.5 फीसदी हो गई है। टीकाकरण कवरेज में सुधार और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता को इसकी बड़ी वजह माना गया है।

अस्पताल में डिलीवरी और ऑपरेशन के मामले बढ़े
देश में 88.7 फीसदी डिलीवरी अब संस्थागत स्तर पर हो रही हैं। वहीं सिजेरियन डिलीवरी का प्रतिशत 17.4 फीसदी तक पहुंच गया है, जिसमें शहरी क्षेत्रों में यह दर अधिक देखी गई है।

हाइपरटेंशन और जीवनशैली रोगों में बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों में हाइपरटेंशन की समस्या महिलाओं की तुलना में अधिक पाई गई है। यह संकेत देता है कि देश में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं।

NFHS-6 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में एक तरफ डिजिटल और सामाजिक सशक्तिकरण बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर मोटापा, शुगर और जीवनशैली संबंधी बीमारियां नई चुनौती बनकर उभर रही हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल और स्वास्थ्य सेवाओं का अंतर अब भी चिंता का विषय बना हुआ है।

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