Thursday , 10 September 2026

सेशेल्स दौरे पर पीएम मोदी के खास तोहफे! पीतल के कछुए से महेश्वरी सिल्क तक, भारतीय विरासत की दिखी अनोखी झलक

नेशनल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीन दिवसीय सेशेल्स दौरे के दौरान वहां के शीर्ष नेताओं और गणमान्य हस्तियों को भारत की समृद्ध कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों के जरिए भारत की पारंपरिक हस्तकला, हथकरघा और लोक कलाओं की झलक देखने को मिली।

प्रधानमंत्री का यह दौरा 27 से 29 जून तक चला। इस दौरान उन्होंने सेशेल्स के राष्ट्रपति, प्रथम महिला, उपराष्ट्रपति और नेशनल असेंबली के स्पीकर को अलग-अलग पारंपरिक भारतीय उपहार प्रदान किए।

राष्ट्रपति को भेंट किया मुरादाबादी पीतल का कछुआ

प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी को मुरादाबाद की प्रसिद्ध पीतल कला से निर्मित कछुआ उपहार स्वरूप दिया। कछुए को बुद्धिमत्ता, धैर्य, स्थिरता और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है। सेशेल्स की पहचान दुनिया के प्रसिद्ध विशाल अल्डब्रा कछुओं से भी जुड़ी हुई है, इसलिए यह उपहार विशेष महत्व रखता है।

प्रथम महिला को मिला बिदरी कला का बॉक्स और महेश्वरी सिल्क स्टोल

प्रथम महिला वेरोनिक हर्मिनी को प्रधानमंत्री ने बिदरी कला से निर्मित एक आकर्षक बॉक्स और महेश्वरी सिल्क का स्टोल भेंट किया। बिदरी कला कर्नाटक के बीदर क्षेत्र की प्रसिद्ध धातु शिल्प परंपरा मानी जाती है, जबकि महेश्वरी सिल्क मध्य प्रदेश के महेश्वर की ऐतिहासिक हथकरघा विरासत का प्रतीक है।

उपराष्ट्रपति को सिक्किम की आर्किड पेंटिंग

सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्ले को प्रधानमंत्री मोदी ने सिक्किम की पारंपरिक आर्किड पेंटिंग भेंट की। यह कलाकृति सिक्किम की समृद्ध पुष्प संपदा और स्थानीय कला परंपराओं को दर्शाती है।

वहीं उनकी पत्नी लीना पिल्ले को तमिलनाडु की प्रसिद्ध कांचीपुरम सिल्क का वस्त्र उपहार में दिया गया। कांचीपुरम सिल्क अपनी उत्कृष्ट बुनाई और पारंपरिक डिजाइन के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

स्पीकर को भेंट की टोडा कढ़ाई वाली शाल

नेशनल असेंबली के स्पीकर अजारेल अर्नेस्टा को प्रधानमंत्री ने टोडा कढ़ाई से सजी विशेष शाल भेंट की। टोडा कढ़ाई तमिलनाडु की नीलगिरि पहाड़ियों में रहने वाले टोडा समुदाय की पारंपरिक हस्तकला है, जिसे उसकी विशिष्ट डिजाइन और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है।

भारतीय संस्कृति और कारीगरी का संदेश

प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए ये उपहार केवल औपचारिक भेंट नहीं थे, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत, हस्तशिल्प परंपराओं और स्थानीय कारीगरों की कला को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का माध्यम भी बने। इन उपहारों में देश के अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक शिल्प कौशल की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

 

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