
पॉलिटिकल डेस्क : पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आती दिख रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफों, विधायकों और सांसदों के बीच बढ़ती नाराजगी तथा कांग्रेस के साथ संभावित राजनीतिक समीकरणों की चर्चाओं ने टीएमसी के अंदरूनी संकट को और गहरा कर दिया है। इन घटनाक्रमों के बीच पार्टी नेतृत्व के सामने एकजुटता बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
ताजा चर्चाओं में अभिनेत्री से सांसद बनीं सायोनी घोष का नाम भी सामने आया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वह भी असंतुष्ट नेताओं के संपर्क में हैं। वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी के हालिया तेवरों ने भी संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी को लेकर अटकलों को हवा दे दी है।
विधानसभा से शुरू हुई अंदरूनी कलह
टीएमसी के भीतर असंतोष की पहली बड़ी तस्वीर पश्चिम बंगाल विधानसभा में देखने को मिली, जहां स्पीकर रथिंद्र नाथ बोस ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 58 बागी विधायकों को मुख्य विपक्षी समूह के रूप में मान्यता दी। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी और पार्टी के भीतर गहराते मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया।
मामला केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रहा। सांसदों के स्तर पर भी अलग धड़ा बनने की खबरों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
सांसदों के बीच भी बढ़ी नाराजगी
बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने हाल ही में पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें करीब 20 सांसदों का समर्थन प्राप्त है। उनके इस बयान के बाद पार्टी के भीतर सियासी हलचल और तेज हो गई।
इसी बीच जादवपुर से सांसद सायोनी घोष और कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय के भी असंतुष्ट खेमे के संपर्क में होने की चर्चाएं सामने आई हैं। इसके अलावा कई अन्य सांसदों के नाम भी बागी गुट से जोड़े जा रहे हैं।
इस्तीफों ने बढ़ाई नेतृत्व की चिंता
टीएमसी को उस समय बड़ा झटका लगा जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपना इस्तीफा दे दिया। बताया गया कि उनका इस्तीफा 10 जून को स्वीकार भी कर लिया गया।
इससे पहले वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर नेतृत्व पर सवाल उठाए थे और इसे लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक चुनौतियों का परिणाम बताया था।
कांग्रेस से बढ़ती नजदीकियों पर अटकलें तेज
टीएमसी के भीतर जारी उथल-पुथल के बीच कांग्रेस के साथ संभावित राजनीतिक समीकरणों की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। हाल ही में ममता बनर्जी की सोनिया गांधी से मुलाकात और उसके बाद पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी की राहुल गांधी से हुई बैठक ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है।
हालांकि कांग्रेस की ओर से किसी भी संभावित विलय या औपचारिक राजनीतिक समझौते की खबरों को खारिज किया गया है।
सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा क्यों माना जा रहा अहम?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सुखेंदु शेखर रॉय का पार्टी छोड़ना सामान्य घटनाक्रम नहीं है। लंबे समय तक पार्टी नेतृत्व के करीबी रहे रॉय को संगठन की प्रमुख आवाजों में गिना जाता था। संसद से लेकर राजनीतिक विवादों तक, उन्होंने लगातार पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा था।
ऐसे में उनका इस्तीफा टीएमसी के लिए केवल एक नेता का जाना नहीं, बल्कि संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में दल-बदल और गुटबाजी नई बात नहीं है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने टीएमसी के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व बढ़ती नाराजगी को किस तरह संभालता है और आने वाले दिनों में यह सियासी संकट किस दिशा में जाता है।
Navyug Samachar