
धर्म डेस्क : राजस्थान का प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर आस्था, विश्वास और चमत्कारी मान्यताओं के लिए देशभर में जाना जाता है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर भगवान के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। खास बात यह है कि यहां बड़ी संख्या में कारोबारी और उद्यमी भगवान सांवलिया सेठ को अपना ‘बिजनेस पार्टनर’ मानते हैं और कारोबार में लाभ होने पर करोड़ों रुपये का चढ़ावा अर्पित करते हैं।
इसी आस्था का नतीजा है कि मंदिर में हर साल चढ़ावे का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बार मंदिर को रिकॉर्ड 337 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ है, जो पिछले कई दशकों में सबसे अधिक बताया जा रहा है।
भगवान को बनाते हैं कारोबार का साझेदार
सांवलिया सेठ मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष मान्यता है कि यदि भगवान को अपने व्यापार का साझेदार बनाया जाए तो कारोबार में उन्नति होती है। कई भक्त अपनी कंपनियों के लेटरहेड पर लिखकर मंदिर में अर्पित करते हैं कि व्यवसाय में लाभ होने पर वे उसका एक हिस्सा भगवान को समर्पित करेंगे।
श्रद्धालुओं का मानना है कि जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत में अर्जुन का मार्गदर्शन किया था, उसी तरह वे उनके कारोबार को भी सफलता की दिशा देते हैं। यही वजह है कि देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
337 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड चढ़ावा
मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस वर्ष मंदिर में करीब 337 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ। दान की गणना के लिए लगभग 200 कर्मचारियों की मदद ली गई। दान पात्र श्रद्धालुओं की मौजूदगी में खोले जाते हैं और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न होती है।
इस दौरान भक्तों ने नकद राशि के अलावा सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुएं भी अर्पित कीं। जानकारी के अनुसार, इस वर्ष करीब 600 ग्राम सोना और 84 किलोग्राम चांदी मंदिर को दान स्वरूप मिली। कई श्रद्धालु ट्रैक्टर जैसी बड़ी वस्तुएं भी भगवान को समर्पित करते हैं। दान पात्रों में भारतीय मुद्रा के साथ विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होती है।
पिछले साल से कहीं ज्यादा बढ़ा चढ़ावा
मंदिर में इस वर्ष मिला चढ़ावा पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक बताया जा रहा है। पिछले साल मंदिर को लगभग 234 करोड़ रुपये का दान मिला था, जबकि इस बार यह आंकड़ा 337 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सिर्फ अप्रैल महीने में ही श्रद्धालुओं ने करीब 41 करोड़ रुपये का चढ़ावा अर्पित किया।
कहां स्थित है सांवलिया सेठ मंदिर?
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित सांवलिया सेठ मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। यह मंदिर चित्तौड़गढ़ से उदयपुर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर भादसोड़ा गांव के पास मंडफिया क्षेत्र में स्थित है। मंदिर की वास्तुकला भी बेहद आकर्षक है और इसे भव्य शैली में विकसित किया गया है।
मीरा बाई से जुड़ी है मंदिर की मान्यता
सांवलिया सेठ मंदिर को लेकर एक प्रचलित मान्यता यह भी है कि इसका संबंध भक्त शिरोमणि मीरा बाई से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि मीरा बाई ने अपने आराध्य गिरधर गोपाल की प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए एक स्थान पर छिपा दिया था। बाद में एक ग्वाले को स्वप्न में संकेत मिला, जिसके बाद उस प्रतिमा की खोज हुई और वहां मंदिर की स्थापना की गई।
बताया जाता है कि मंडफिया स्थित यह मंदिर करीब 450 वर्ष पुराना है और इसका निर्माण मेवाड़ राजपरिवार के संरक्षण में कराया गया था।
Navyug Samachar